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आप कैसे साबित करेंगे अपनी नागरिकता? कौन से दस्तावेज हैं मान्य, जानें हर एक सवाल का जवाब

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विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ़ किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा का दस्तावेज़ है, न कि नागरिकता का सबूत। 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पासपोर्ट विदेश में भारतीयों की राष्ट्रीयता तो बताता है, लेकिन इसे नागरिकता का दस्तावेज़ नहीं माना जाना चाहिए। यह बयान नागरिकता से जुड़े दस्तावेज़ों और वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच आया है। सरकार ने संसद में यह भी साफ़ किया है कि नेशनल रजिस्ट्री ऑफ़ सिटिज़न (NRC) बनाने की कोई योजना नहीं है। इस बयान ने एक पुराने कानूनी सवाल पर फिर से चर्चा छेड़ दी है कि आखिर कौन से दस्तावेज़ भारतीय नागरिकता साबित करते हैं? कैसे आप साबित करेंगे कि आप भारत के नागरिक हैं?

क्यों पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है?

MEA ने साफ़ किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है जो विदेश में धारक की राष्ट्रीयता की पुष्टि करता है। कानूनी तौर पर, नागरिकता ‘नागरिकता अधिनियम’ (Citizenship Act) के तहत तय होती है, जबकि पासपोर्ट ‘पासपोर्ट अधिनियम’ (Passports Act) के तहत जारी किया जाता है और यह हर स्थिति में अपने-आप नागरिकता का पक्का सबूत नहीं होता है।

नागरिकता का सबूत क्या है?
इसका जवाब साफ़ साफ नहीं दिया जा सकता है। इसे लेकर संसद में सरकार का रुख़ बस यही रहा है कि “भारतीय नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया नागरिकता अधिनियम, 1955 और उसके तहत बने नियमों से तय होती है। भारत की नागरिकता जन्म, वंश, रजिस्ट्रेशन, नैचुरलाइज़ेशन (प्राकृतिक रूप से नागरिकता मिलना) या किसी क्षेत्र के भारत में विलय से हासिल की जा सकती है।”

नागरिकता साबित करने के लिए कौन से दस्तावेज़ काम आ सकते हैं?

  • जन्म प्रमाण-पत्र
  • माता-पिता के नागरिकता प्रमाण-पत्र
  • माता-पिता की भारतीय नागरिकता दिखाने वाले रिकॉर्ड
  • माता-पिता के भारतीय पासपोर्ट
  • जन्म, माता-पिता और राष्ट्रीयता से जुड़े अन्य रिकॉर्ड

भारतीय नागरिकता कैसे प्राप्त की जा सकती है?
नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) पर PIB के एक सवाल-जवाब के अनुसार, नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारतीय नागरिकता पांच तरीकों से प्राप्त की जा सकती है:

  • जन्म से नागरिकता
  • वंश के आधार पर नागरिकता
  • पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) द्वारा नागरिकता
  • प्राकृतिक रूप से (नेचुरलाइज़ेशन) नागरिकता
  • क्षेत्र के विलय (इनकॉरपोरेशन) द्वारा नागरिकता

क्या कोई ऐसा एक दस्तावेज़ है जो भारतीय नागरिकता साबित करता हो?
नहीं। भारत कोई ऐसा एक दस्तावेज़ जारी नहीं करता जो सभी नागरिकों के लिए नागरिकता का पक्का सबूत हो। नागरिकता इस आधार पर तय होती है कि वह कैसे हासिल की गई और नागरिकता कानून के तहत कौन से सहायक दस्तावेज़ मौजूद हैं।

भारतीय नागरिक को नागरिकता प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है?
नागरिकता प्रमाण-पत्र आम तौर पर उन लोगों को जारी किए जाते हैं जो रजिस्ट्रेशन या नेचुरलाइज़ेशन के ज़रिए भारतीय नागरिकता हासिल करते हैं। ज़्यादातर भारतीय जो जन्म या वंश के आधार पर नागरिक हैं, उनके पास नागरिकता प्रमाण-पत्र नहीं होता है। ऐसे मामलों में, नागरिकता जन्म की तारीख और जगह, माता-पिता की जानकारी और राष्ट्रीयता से जुड़े कई दस्तावेज़ों के आधार पर तय की जाती है।

भारतीय नागरिकता का सीधा सबूत क्या है?
जो लोग रजिस्ट्रेशन या नेचुरलाइज़ेशन (प्राकृतिक रूप से नागरिकता पाने) के ज़रिए भारतीय नागरिक बने हैं, उनके लिए सरकार द्वारा जारी नागरिकता प्रमाण-पत्र नागरिकता का सीधा सबूत होता है।

सरकार का क्या कहना है
20 दिसंबर, 2019 को सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने NRC से जुड़े एक सवाल-जवाब में कहा: ‘जन्म की तारीख और जन्म स्थान से जुड़े कोई भी दस्तावेज़ जमा करके नागरिकता साबित की जा सकती है। हालांकि, ऐसे स्वीकार्य दस्तावेज़ों पर अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है।’

क्या आधार, वोटर ID और ड्राइविंग लाइसेंस नागरिकता का सबूत हैं?
नहीं। आधार कार्ड, वोटर ID और ड्राइविंग लाइसेंस मुख्य रूप से पहचान, निवास या चुनावी रजिस्ट्रेशन की पुष्टि करते हैं। इन्हें अकेले नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जाता है।

पहचान के दस्तावेज़ अपने-आप नागरिकता साबित क्यों नहीं करते?
आधार, वोटर ID और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज़ खास मकसदों जैसे पहचान की पुष्टि, चुनावी रजिस्ट्रेशन या गाड़ी चलाने की इजाज़त के लिए जारी किए जाते हैं। इन्हें नागरिकता का स्टेटस तय करने के लिए नहीं बनाया गया है और इसलिए इन्हें अकेले नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जाता है।

भारतीय कानून क्या कहता है?
इसका जवाब थोड़ा पेचीदा है। कई देशों के उलट, भारत में ऐसा कोई एक सर्वमान्य नागरिकता प्रमाण-पत्र नहीं है जो हर नागरिक को जन्म के समय अपने-आप मिल जाता हो। सरकार का अपना रुख भी इस जटिलता को दिखाता है। फरवरी 2020 में, जब संसद में यह पूछा गया कि क्या आधार, पासपोर्ट, वोटर ID, पैन कार्ड या जन्म प्रमाण-पत्र को नागरिकता साबित करने के लिए वैध दस्तावेज़ माना जा सकता है, तो केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इनमें से किसी को भी पक्का सबूत मानने से इनकार कर दिया।

जान लें ये खास बातें….

  • पासपोर्ट इस बात का मज़बूत सबूत हो सकता है कि सरकार ने किसी व्यक्ति के नागरिकता के दावे को स्वीकार कर लिया है।
  • वोटर कार्ड यह दिखा सकता है कि चुनाव अधिकारियों ने उस व्यक्ति को नागरिक-वोटर के तौर पर रजिस्टर होने के लायक माना है।
  • जन्म प्रमाण पत्र भारत में जन्म की पुष्टि तो कर सकता है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि वह बदलते कानूनी ढांचे के तहत नागरिकता से जुड़े हर सवाल का जवाब दे।
  • हर दस्तावेज़ एक तथ्य साबित करता है; कोई भी दस्तावेज़ हर मामले में नागरिकता के सवाल को पूरी तरह से हल नहीं करता है।
  • भारत ने कभी भी राष्ट्रीय नागरिकता कार्ड नहीं अपनाया है।
  • आधार से नागरिकता साबित नहीं होती है। आधार से जुड़ा कानून सिर्फ़ नागरिकों के ही नहीं, बल्कि निवासियों के भी एनरोलमेंट की इजाज़त देता है और कानून में यह साफ़ कहा गया है कि यह नागरिकता का सबूत नहीं है। यह अमेरिका के सोशल सिक्योरिटी नंबर जैसा है और नागरिकता का सबूत नहीं है, हालांकि यह अनौपचारिक रूप से रहने का सबूत ज़रूर है।
  • पैन कार्ड टैक्स की पहचान के लिए होता है। यह रहने या नागरिकता का सबूत नहीं है, बल्कि सिर्फ़ इस बात का दस्तावेज़ है कि व्यक्ति भारत में टैक्स देता है (या भारत में कमाई करता है)।
  • वोटर कार्ड से चुनावी रजिस्ट्रेशन का पता चलता है। स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया से लग सकता है कि वोटर ID नागरिकता का सबूत है, लेकिन ऐसा नहीं है। जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साफ़ किया है, वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब नागरिकता खत्म होना नहीं है।
  • राशन कार्ड किसी कल्याणकारी योजना में शामिल होने का सबूत होता है।
  • ऐतिहासिक रूप से भारत की क़ानूनी व्यवस्था इस धारणा पर काम करती रही है कि ज़्यादातर लोग नागरिक हैं, जब तक कि कोई खास विवाद न खड़ा हो जाए। इसलिए, नागरिकता का पता किसी एक बुनियादी दस्तावेज़ से नहीं, बल्कि कई तरह के रिकॉर्ड्स से लगाया जाता है।

नागरिकता की जांच, वोटर लिस्ट की पड़ताल और माइग्रेशन कंट्रोल जैसी प्रक्रियाओं ने यह साफ़ कर दिया है कि नागरिकता का कोई ऐसा दस्तावेज़ नहीं है जिसे हर जगह मान्यता मिली हो। तो ऐसे में ज़्यादातर भारतीयों के लिए इन सारे सवालों का जवाब बस यही होगा कि उनका जन्म भारत में ऐसे माता-पिता के घर हुआ जो खुद भारत में पैदा हुए थे, और उनके माता-पिता भी भारत में ही पैदा हुए थे – और इनमें से किसी के पास भी नागरिकता साबित करने वाला कोई दस्तावेज़ नहीं है।

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