सकरी। (कैलाश वस्त्रकार) हांफा में देवाधिदेव सिद्ध बघर्रा पाठ भगवान नृसिंह नाथ मंदिर पर ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और वेदों की जननी माँ गायत्री के अवतरण दिवस के शुभ संयोग पर एक मनमोहक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस विशेष दिन पर पूरा मंदिर परिसर भक्ति के रंग में डूबा नजर आया मंदिर के पंडित धनेश उपाध्याय ने बताया कार्यक्रम की शुरुआत सुबह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के साथ हुई एवं महिला कीर्तन मंडली द्वारा एकताल में ढोलक, मंजीरे और करताल की थाप पर ‘अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं…’ और ‘गायत्री मंत्र’ की संगीतमय प्रस्तुतियां दीं मधुर भजनों की गूंज से पूरा माहौल आध्यात्मिक और आनंदित हो गया इस धार्मिक कार्यक्रम में मंदिर परिसर दिनभर भगवान विष्णु मां गायत्री एवं नृसिंह की जयकारो व भजनों से गूंजता रहा आचार्य जी ने बताया साल के सभी 24 एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माने जानी वाली निर्जला एकादशी व्रत है एवं निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है.
पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडव पुत्र भीमसेन ने महर्षि वेद व्यास के निर्देश पर इस कठिन उपवास को किया था जिसमें जल की एक बूंद को भी ग्रहण करना वर्जित होता है व्रत रखने वाले श्रद्धालु आज पूरे दिन और रात भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते हैं सायं काल रामायणी भक्तों द्वारा रामायण का पाठ एवं गायन प्रस्तुत किया गया मधुर भजनों और रामायण की चौपाइयों के गायन से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा संध्या महा आरती के पश्चात भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया आयोजन को भव्य रूप देने में श्री शिवाय नमस्तुभ्यं महिला मंडली में श्रीमती गायत्री उपाध्याय, श्रीमती सरिता जितेंद्र तिवारी, श्रीमती श्रीदेवी दुबे ,श्रीमती रत्ना पाण्डेय, कविता दुबे, बंटी कौशिक, श्रीमती ऊषा तिवारी, निशा तिवारी, श्रीमती पार्वती उपाध्याय , श्रीमती द्रोपती पांडेय ,श्रीमती रंजना उपाध्याय, श्रीमती सुलभा यादव, श्रीमती किरण दुबे, पूर्णिमा साहू, कुमारी सोनल उपाध्याय, कुमारी शिवांगी उपाध्याय एवं सभी मानस भक्त उपस्थित रहे.



