कोरिया : जिले की जीवनदायिनी हसदेव नदी के उद्गम स्थल के संरक्षण, संवर्धन एवं पर्यटन विकास को लेकर कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने शुक्रवार को उद्गम स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के साथ चर्चा कर हसदेव नदी के संरक्षण एवं विकास के लिए सुझाव लिए तथा सभी को नदी संरक्षण की शपथ भी दिलाई।
कलेक्टर श्रीमती यादव ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप नदियों के संरक्षण के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने हसदेव उद्गम स्थल के सौंदर्यीकरण, पर्यटन सुविधाओं के विकास एवं इसे प्रमुख दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित करने के लिए ग्रामीणों से सक्रिय सहयोग और सुझाव देने का आग्रह किया।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि हसदेव नदी की पहचान केवल कोरिया जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश और देश में है। ऐसे में उद्गम स्थल को एक आकर्षक पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए जनसहभागिता आवश्यक है।
कलेक्टर ने ग्राम मेडरावासियों को सुझाव देते हुए कहा कि हसदेव उद्गम स्थल एवं आसपास के क्षेत्र के संरक्षण और विकास के लिए पंचायत, वन एवं जल संसाधन विभाग की संयुक्त समिति गठित कर सर्वसम्मति से विकास प्रस्ताव तैयार किए जाएं, जिससे इस ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान मिल सके।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जिले की प्रमुख नदियों के पुनर्जीवन एवं संरक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि नदी संरक्षण सीधे जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा विषय है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदियों के कैचमेंट क्षेत्र में ऐसे जनोपयोगी कार्य किए जाएं, जो भविष्य में स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप हों तथा इनमें जनप्रतिनिधियों और सरपंचों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
कलेक्टर ने पंचायत, जल संसाधन, वन एवं खनिज विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले से उद्गम होने वाली नदियों के ऐतिहासिक महत्व का दस्तावेजीकरण किया जाए। साथ ही स्थानीय स्कूलों के विद्यार्थियों का उद्गम स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाए तथा नदी संरक्षण विषय पर प्रतियोगिताओं और जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। उन्होंने उद्गम स्थलों पर मेला एवं उत्सव आयोजित करने की संभावनाओं पर भी कार्य करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कैचमेंट क्षेत्र में वृक्षारोपण, जलग्रहण, वाटर रिचार्ज एवं आवश्यक जल संरचनाओं के निर्माण के लिए वीबीजीआरएएम, कैम्पा, मनरेगा, डीएमएफ सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही हसदेव उद्गम स्थल को पर्यटन से जोड़ने और क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अपशिष्ट न फेंके जाने के लिए नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
इस अवसर पर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता ए. टोप्पो ने नदी संरक्षण, जल प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।



