पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें एक ऐप के जरिए ई-रिक्शा को रोक दिया जाता है। यह सब ई-रिक्शा में इस्तेमाल किए जाने वाले बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में पावर सप्लाई बंद करके किया जा रहा है। महाकाल की नगरी उज्जैन के ऐसे ही वीडियो सामने आने के बाद एमपी पुलिस ने एक 18 साल के संदिग्ध की गिरफ्तारी भी की। रिपोर्ट के मुताबिक, शख्स वीडियो बनाने के लिए ई-रिक्शा ड्राइवर को परेशान कर रहा था।
चलते-चलते रूक जा रहे ई-रिक्शा
कई शहरों से मिल रही शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच और पुलिस की टीम ने जांच की और 18 साल के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि यह सब एक मोबाइल ऐप के जरिए किया जा रहा था। ऐसे में देश में चल रहे लाखों की संख्यां में ई-रिक्शा की सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो गया। इन रिक्शा को कोई भी अपने फोन से कंट्रोल कर सकता है, जो उसमें सवार यात्रियों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है।
अगर ई-रिक्शा चलते-चलते अचानक रूक जाए तो इसमें बैठे यात्री सड़क पर गिर सकते हैं और हादसे का शिकार हो सकते हैं। ऐसी भी खबरें सामने आई हैं कि कुछ शरारती लोगों ने सर्विस के नाम पर ई-रिक्शा ड्राइवर से 200 से 300 रुपये की अवैध वसूली भी की है।
क्यों आई दिक्कत?
ई-रिक्शा में इस्तेमाल किए जाने वाले BAT-BMS ऐप को चीनी कंपनी Shenzhen Grenergy Technology ने डेवलप किया है। ज्यादातर ई-रिक्शा चालकों को इसके बारे में पता ही नहीं है। न ही उन्हें ई-रिक्शा डीलर ने बताने की कोशिश की है। इस BMS ऐप में पासवर्ड ऑथेंटिकेशन नहीं है, जिसकी वजह से किसी भी स्मार्टफोन के ब्लूटूथ का इस्तेमाल करके नजदीक के ई-रिक्शा के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में एंटर किया जा सकता है। बैटरी को ऑन या ऑफ करके ई-रिक्शा के पावर सप्लाई से छेड़खानी भी की जा सकती है। इस ऐप में छेड़खानी के अलावा कई ई-रिक्शा ड्राइवर जानकारी के अभाव में इसका शिकार हो रहे हैं।
क्या है BAT-BMS ऐप?
इस ऐप को बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) को कंट्रोल और मॉनिटर करने के लिए यूज किया जाता है। BMS को लिथियम बैटरी का कंट्रोल सेंटर भी कहा जाता है।ऐप के जरिए आप ई-रिक्शा में लगे लिथियम बैटरी की कैपेसिटी, चार्जिंग साइकिल आदि को मॉनिटर कर सकते हैं। लीथियम बैटरी को फोन से कनेक्ट करने के लिए इसमें एक लो पावर ब्लूटूथ-इनेबल्ड डिवाइस लगा होता है। हर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में हर बैटरी के लिए एक यूनीक आईडी लिंक होता है। इसके जरिए बैटरी के बारे में सभी जानकारी फोन की स्क्रीन पर एक्सेस किया जा सकता है।
BMS में एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का इस्तेमाल होता है जो लगातार बैटरी के वोल्टेज, टेम्परेटर, करेंट फ्लो और चार्जिंग स्टेटस आदि को मॉनिटर करती रहती है। इसके साथ एक ब्लूटूथ लो एनर्जी यानी BLE मॉड्यूल लगा होता है, जो ड्राइवर्स, डीलर्स और बैटरी निर्माता मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी की हेल्थ मॉनिटर करते हैं। इसके लिए स्मार्टफोन को ब्लूटूथ की रेंज में रखना पड़ता है। कनेक्शन स्थापित होने के बाद ऐप के जरिए BMS को कंट्रोल किया जा सकता है।
क्या है सॉल्यूशन?
- ई-रिक्शा में इस्तेमाल की जाने वाली बैटरी के BMS को यूजरनेम और पासवर्ड के जरिए लॉक किया जा सकता है, लेकिन ड्राइवर्स इसे लेकर अंजान हैं। कई ई-रिक्शा ड्राइवर्स को इसे लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है और न ही ट्रेनिंग। जैसे वो अपना स्मार्टफोन लॉक करते हैं वैसे ही वो BMS को भी लॉक कर सकते हैं।
- ई-रिक्शा डीलर्स को नया रिक्शा खरीदने वालों को इसके बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए। इसके बाद पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके इसकी सुरक्षा बढ़ानी चाहिए, ताकि कोई इसके साथ छेड़खानी न कर सके।
- डीलर्स के अलावा जो ऑथोरिटी इन ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन करती है या नंबर प्लेट जारी करती हैं, उन्हें भी BMS के बारे में ड्राइवर्स को अवगत कराना होगा, ताकि ई-रिक्शा की सवारी कर रहे यात्री सुरक्षित रहे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ई-रिक्शा वाली घटना सामने आने के बाद सरकार ने BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion ऐप्स को हटाने का निर्देश दिए हैं, जिनका कथित तौर पर बैटरी वाहनों को रिमोट से बंद करने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था।
क्या सोलर ग्रिड भी हो सकते हैं प्रभावित?
इस BAT-BAS यानी ब्लूटूथ इनेबल्ड बैटरी मैनेजमेंट सर्विस को हैक करके ई-रिक्शा ही नहीं सोलर ग्रिड सिस्टम को भी निशाना बनाया जा सकता है। सोलर इनवर्टर को पावर स्टोरेज डिवाइस यानी बैटरी के साथ कम्युनिकेट करने के लिए BMS का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिए इन्वर्टर और बैटरी एक-दूसरे के साथ कम्युनिकेट करते हैं। इसके लिए एक कम्युनिकेशन केबल को बैटरी और इन्वर्टर के साथ जोड़ा जाता है।
हाइब्रिड और ऑफग्रिड सोलर प्लांट में इस्तेमाल की जाने वाली लिथियम बैटरी में BMS यूज होता है, जिसे अगर रिमोटली कंट्रोल कर लिया जाए तो इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई बंद की जा सकती है। ऐसे में अगर अपराधी को ग्रिड में लगे BMS का एक्सेस मिल जाए तो ब्लैकआउट भी हो सकता है। हालांकि, सोलर पावर प्लांट लगाने वाली कंपनियों के इंजीनियर हाईब्रिड या ऑफग्रिड सिस्टम लगाते करते समय BMS को यूजरनेम और पासवर्ड के जरिए लॉक कर देते हैं, ताकि कोई भी इसे बाहर से एक्सेस न कर पाए।



