हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित व्रत किया जाता है. इसको एकादशी व्रत कहते हैं. साल में 24 और अधिकमास में 26 एकादशी के व्रत पड़ते हैं. मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी का व्रत पड़ता है.धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु का व्रत और पूजन करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. यही नहीं मान्यता ये भी है कि योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्रह्माणों को भोजन कराने का पुण्य देता है. इस साल योगिनी एकादशी के व्रत की तारीख को लेकर लोगों को मन में संशय है, लेकिन ये व्रत 10 जुलाई को रखा जाएगा. आइए जानते हैं योगिनी एकादशी का महत्व.
योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व:- योगिनी एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली सबसे पुण्यदायी एकादशियों शामिल है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो लोग इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करते हैं, उनके जाने-अनजाने में किए गए सारे पापों का नाश हो जाता है. इस व्रत का पुण्य 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना गया है. कहा ये भी जाता है कि ये व्रत लंबे समय की बीमारी, मानसिक तनाव या जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति प्रदान करता है. यह व्रत सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति को पाने का सबसे उत्तम मार्ग है.
योगिनी एकादशी 2026 की तिथि
1. वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर होगी.
2. वहीं, इस तिथि का समापन 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर होगा.



