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कलियुग में जब इंसानों की उम्र रह जाएगी सिर्फ 20 से 30 साल, पढ़िए भागवत पुराण की खौफनाक भविष्यवाणियां

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हिंदू धर्म शास्त्रों में 4 युगों का वर्णन देखने को मिलता है। जिसमें सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग शामिल है। 4 युगों में से 3 युग बीत चुके हैं, वर्तमान समय कलियुग का चल रहा है। सत युग को कृत युग के नाम से भी जाना जाता है।

शास्त्रों में सतयुग की उम्र 17, 28, 000 साल बताई गई है, जबकि त्रेता युग की आयु कुल 12, 96, 000 साल है, द्वापर युग की आयु कुल 8, 64, 000 साल और कलियुग की कुल आयु 4, 32,000 साल बताई गई है। हिंदू धर्म शास्त्रों में कलियुग को लेकर बताया गया है कि, जैसे-जैसे कलियुग में समय आगे बढ़ेगा, मनुष्य के अच्छे गुण कम होते चले जाएंगे। धर्म के प्रति आस्था कम होते चली जाएगी। मनुष्य नीच कामों में लिप्त रहेगा। समाज में विश्वास, दयालुता और आपसी भाईचारे की भावना खत्म हो जाएगी। आइए जानते हैं श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार कलियुग के लक्षणों के बारे में। वित्तमेव कलौ नृणां जन्माचारगुणोदयः । धर्मन्यायव्यवस्थायां कारणं बलमेव हि ॥

श्रीमद्भागवत के इस श्लोक में बताया गया है कि, कलियुग में समय जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे धर्म, सच्चाई, पवित्रता, माफी, दयालुता, उम्र, बल और स्मरण शक्ति खत्म हो जाएगी। कलियुग में जिसके पास भी पैसा होगा, उसी को लोग कुलीन, सदाचारी और सद्गुणी मानेंगे। जिसके हाथ में शक्ति होगी वही धर्म और न्याय की व्यवस्था को अपने हिसाब से चलाएगा। कलियुग के अंत में मनुष्य की उम्र कम हो जाएगी

त्रिंशद्विंशति वर्षाणि परमायुः कलौ नृणाम्।।

श्रीमद्भागवत के 12.2.11 श्लोक में बताता है कि, कलियुग के अंत तक आते-आते मनुष्यों की अधिकतम उम्र सिर्फ 20 से 30 साल रह जाएगी। इसके अलावा मनुष्य इतना लोभी और दुष्ट हो जाएगा कि, अपने बूढ़े और असहाय माता-पिता की सेवा नहीं करेंगे और आदर व कृतज्ञता के सबसे बड़े कर्तव्य को छोड़ देंगे।

कलियुग में शासक प्रजा का करेगा शोषण
एवं प्रजाभिर्दुष्टाभिर् आकीर्णे क्षितिमण्डले।
ब्रह्मविट्क्षत्रशूद्राणां यो बली भविता नृप: ।।

इस श्लोक में बताया गया है कि, जब पृथ्वी भ्रष्ट जनता से भर जाएगी, तब समाज के किसी भी वर्ग वह व्यक्ति जो सबसे शक्तिशाली होगा, राजनीतिक सत्ता पर आसीन होकर जनता की रक्षा करने के बजाए उनका शोषण करेगा, उन्हें लूटेगा। कलियुग के असर की वजह से पवित्र गुण जैसे कि, धर्म, सत्यता, पवित्रता, क्षमा, दया, आयु, शारीरिक शक्ति और याद रखने की क्षमता कमजोर हो जाएगी।

अनाढ्यतैवासाधुत्वे साधुत्वे दम्भ एव तु ।
स्वीकार एव चोद्वाहे स्नानमेव प्रसाधनम् ॥५॥

अर्थात्- कलियुग में जो व्यक्ति गरीब होगा, उसे समाज में असाधु या पापी समझ लिया जाएगा। पांखड चरम पर रहेगा। शादी सिर्फ एक मौखिक समझौते पर टिकेगा। नहाने मात्र से ही लोग खुद को अंदर और बाहर से पवित्र और सुंदर मान लेंगे।

कलियुग में भयंकर अकाल पड़ेगा
शाकमूलामिषक्षौद्रफलपुष्पास्तिभोजना:।
अनावृष्टया विनाङथक्ष्यन्ति दुर्भिक्षकरपीदिता:॥

अर्थात्- कलियुग में अकाल और अधिक टैक्स के कारण लोग त्रस्त होकर सूखे पत्ते, जड़े, मांस, जंगली शहद, फल, फूल और बीज खाने को मजबूर हो जाएंगे। सूखे की मार से वे पूरी तरह बर्बादी की कगार पर आ जाएंगे। हर कोई भूख, प्यास, बीमारियों और कभी न समाप्त होने वाली चिंताओं का सामना करेंगे।

कलियुग के लक्षण (1)

कलियुग में स्त्री और पुरुष के बीच संबंध
दम्पत्यो अभिरुचिर्हेतुर् मायैव व्यावहारिकम् । स्त्रीत्वे पुंस्त्वे च हि रतिर् विप्रत्वे सूत्रमेव हि ॥

अर्थात्-कलियुग में पुरुष और स्त्री सिर्फ शारीरिक आकर्षण और वासना के वजह से साथ रहेंगे। व्यापार में सफलता पूरी तरह से धोखेबाजी पर निर्भर करेगी। स्त्रीत्व और पुरुषत्व की पहचान सिर्फ कामुकता से होगी। कोई भी व्यक्ति ज्ञान के बिना सिर्फ एक जनेऊ पहनकर खुद को ब्राह्माण या ज्ञानी कहेगा।

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