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सक्ती जिला अस्पताल खुद बीमार: चारों ओर गंदगी का अंबार, जलभराव के बीच से गुजरने को मजबूर मरीज और परिजन

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सक्ती : छत्तीसगढ़ के नवगठित सक्ती जिले के एकमात्र जिला अस्पताल की हालत इन दिनों बद से बदतर हो चुकी है। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के तमाम दावों के उलट, अस्पताल परिसर खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। अस्पताल में चारों तरफ फैली गंदगी, बदबू और अव्यवस्था के कारण यहां आने वाले मरीज और उनके परिजन बेहद परेशान हैं।

वार्डों में पसरी गंदगी, संक्रमण का खतरा
जिला अस्पताल के भीतर विभिन्न वार्डों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। नियमित सफाई न होने के कारण वार्डों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। टॉयलेट से लेकर कॉरिडोर तक में कचरा और बदबू पसरी रहती है, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को राहत मिलने के बजाय अन्य संक्रमण होने का खतरा लगातार बना हुआ है। गंभीर मरीजों के बीच इस तरह की लापरवाही प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करती है।

मुख्य मार्ग पर जलभराव, ‘सड़क’ या ‘तालाब’ का भ्रम
अस्पताल की सबसे विकट समस्या इसके मुख्य मार्ग की है। हल्की सी बारिश के बाद अस्पताल में प्रवेश करने का मुख्य रास्ता पूरी तरह पानी में डूब जाता है। जलभराव इस कदर है कि लोगों को समझ नहीं आता कि यह अस्पताल का रास्ता है या कोई तालाब।

महिलाएं और गंभीर मरीज पानी से होकर गुजरने को मजबूर
निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और लाचार बुजुर्ग मरीजों को हो रही है। डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं और व्हीलचेयर या बैसाखी के सहारे चलने वाले मरीजों को भी इसी गंदे और घुटने तक भरे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। परिजनों को मरीजों को गोद में उठाकर या खींचते हुए ले जाना पड़ रहा है, जो बेहद शर्मनाक स्थिति है।

प्रबंधन मौन, जनता में भारी आक्रोश
एकमात्र जिला अस्पताल होने के कारण पूरे जिले के लोग इलाज के लिए इसी पर निर्भर हैं। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए मांग की है कि जल्द से जल्द मुख्य मार्ग से पानी निकासी की व्यवस्था की जाए और अस्पताल के भीतर सफाई व्यवस्था दुरुस्त की जाए, ताकि लोगों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।

दीपन दीप समिति का हाल: सदस्य राम अवतार अग्रवाल बोले—, बैठक तक तो होती नहीं, काम क्या होगा!” कागजों पर चल रही समिति की जमीनी हकीकत खुद उसके सदस्य बयां कर रहे हैं।

अस्पताल में जलभराव की स्थिति न बने, इसके लिए हमने नगरपालिका प्रशासन को ड्रेनेज (पानी निकासी) व्यवस्था ठीक करने हेतु पत्र जारी किया है। वर्तमान में स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए बाहर से विशेष मजदूर बुलाकर सफाई कार्य कराया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि परिसर पूरी तरह स्वच्छ और सुरक्षित रहे।”

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