सावन माह देवों के देव महादेव की अराधना को समर्पित किया गया है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल सावन का माह 30 जुलाई के प्रारंभ हो रहा है, जिसका समापन 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ होगा. इस पूरे माह में देशभर के शिव मंदिरों में शिव जी के भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है. कोई कांवड़ में जल लाकर महादेव का अभिषेक करता है, तो कई महादेव को उनकी प्रिय चीजें अर्पित करके उनसे सुख-समृद्धि की कामना करता है.महादेव की सभी पूजन सामग्रियों में उनको बेलपत्र सबसे अधिक प्रिय है. इसका शिव पूजा में खास महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि बेलपत्र माता लक्ष्मी की तपस्या से उत्पन्न हुआ है. यही कारण है कि यह अत्यंत पावन माना जाता है. शिव पुराण सहित कई ग्रंथों में शिव जी को बेलपत्र अर्पित करने के महत्व के बारे में विसतार से बताया गया है. बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाओं को पूरा करते हैं. अक्सर शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाया जाता है. आइए जानते हैं इसको चढ़ाने के पीछे की मान्यता.
तीन पत्तियों वाले बेलपत्र का महत्व:- तीन पत्तियों वाले बेलपत्र का विशेष अध्यात्मिक अर्थ बताया जाता है. इसकी हर पत्ती भगवान शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक मानी गई है. भगवान के तीन नेत्र ज्ञान, शक्ति और विवेक का प्रतिनिधित्व करते हैं. साथ ही इसका संबंध शिव जी के त्रिशूल के तीनों शूलों से भी बताया जाता है, जिनसे सृष्टि के संतुलन और रक्षा का संकेत मिलता है. तीन पत्तियों वाला बेलपत्र भगवान शिव को चढ़ाने से उनकी पूजा पूर्ण होती है.
तीन पत्तियों वाले बेलपत्र की मान्यताएं:- मान्यता के अनुसार बेलपत्र की तीन पत्तियों के पास संसार के तीन गुणों सत्व, रज और तम का प्रतिनिधित्व है. सत्व गुण को शुद्धता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है रज गुण को क्रियाशीलता और ऊर्जा का और तम को स्थिरता व विश्राम का सूचक माना जाता है. वहीं कुछ मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र की तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप हैं. बेलपत्र के माध्यम से सृजन, पालन और संहार की शक्तियों का सम्मान किया जाता है, इसलिए इसको शिव पूजा में अनिवार्य माना गया है.



