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पारंपरिक वैद्यों की सहभागिता से मलेरिया एवं मौसमी बीमारियों पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

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खड़गवां में आयोजित सिरहा-गुनिया बैगा सम्मेलन में स्वास्थ्य विभाग ने दिया जनजागरूकता का संदेश

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी: जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने, मलेरिया एवं अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम को जनआंदोलन का स्वरूप देने तथा पारंपरिक वैद्यों को स्वास्थ्य विभाग के साथ जोड़कर सामुदायिक सहभागिता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विकासखंड भरतपुर अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां में सिरहा-गुनिया बैगा सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।

यह सम्मेलन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. नम्रता चक्रवर्ती खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ मनीष प्रताप सिंह एवं जिला मलेरिया सलाहकार श्री संजीत सिंह के उपस्थिति में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की आराध्य देवी मां महामाया के जयघोष एवं सेवा-अर्जी के साथ अत्यंत श्रद्धा एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप किया गया। इसके पश्चात सभी सिरहा, गुनिया, बैगा एवं माता-पुजारियों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति एवं स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय का प्रेरणादायी संदेश देखने को मिला।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने कहा कि “जनजातीय क्षेत्रों में सिरहा, गुनिया, बैगा एवं पारंपरिक वैद्य समाज के अत्यंत सम्मानित एवं प्रभावशाली सदस्य होते हैं। समुदाय का इन पर गहरा विश्वास होता है। यदि इन्हें स्वास्थ्य विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रमों से जोड़ा जाए, तो मलेरिया, डेंगू, टीबी, फाइलेरिया सहित अन्य मौसमी बीमारियों की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार एवं प्रभावी रोकथाम में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है।”

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समुदाय को जागरूक एवं आत्मनिर्भर बनाना भी है। इस दिशा में सिरहा-गुनिया सम्मेलन एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

डॉ. खरे ने सभी सिरहा, गुनिया, बैगा एवं माता-पुजारियों से अपील की कि वे अपने-अपने ग्रामों में स्वास्थ्य प्रहरी के रूप में कार्य करते हुए लोगों को बुखार होने पर तत्काल जांच कराने, मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, स्वच्छता बनाए रखने, टीबी के लक्षणों की पहचान कर समय पर जांच कराने, गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसवपूर्व जांच (ANC), नियमित टीकाकरण तथा शासन द्वारा संचालित सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य विभाग और पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के बीच इस प्रकार की सहभागिता से जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और अधिक सुदृढ़ होगी तथा “स्वस्थ ग्राम–स्वस्थ परिवार–स्वस्थ जिला” के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।

अपने संबोधन में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ मनीष प्रताप सिंह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक वैद्य समाज के सबसे विश्वसनीय व्यक्तियों में शामिल होते हैं। यदि वे स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कार्य करें तो मलेरिया सहित अनेक संक्रामक एवं मौसमी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने मलेरिया की समय पर पहचान, बुखार आने पर तत्काल रक्त जांच, समय पर उपचार, डेंगू, फाइलेरिया, चिकनगुनिया, पीलिया, एचपीवी (HPV) टीकाकरण, मधुमेह, सर्पदंश (Snake Bite) जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

प्रतिभागियों को मलेरिया सलाहकार संजीत सिंह ने बताया गया कि किसी भी व्यक्ति को बुखार आने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय व्यर्थ न करते हुए तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में रक्त जांच करानी चाहिए, क्योंकि समय पर जांच एवं उपचार से मलेरिया जैसी
गंभीर बीमारी से होने वाली जटिलताओं एवं मृत्यु को रोका जा सकता है। साथ ही नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने, घर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखने, जल जमाव रोकने, स्रोत नियंत्रण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा समुदाय को इन उपायों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया गया।

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल बीमारियों का उपचार करना नहीं, बल्कि समुदाय को बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक बनाना भी है। उन्होंने सिरहा-गुनिया एवं पारंपरिक वैद्यों से अपील की कि वे अपने सामाजिक प्रभाव का उपयोग करते हुए लोगों को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने, जांच कराने एवं चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मान्यताओं एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धति के समन्वय से जनजातीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन (टीबी) कार्यक्रम, गैर-संचारी रोग (NCD) कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच (ANC), मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित टीकाकरण, पोषण, परिवार कल्याण, मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप की जांच तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। साथ ही यह भी बताया गया कि गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उपस्थित सिरहा-गुनिया एवं माता-पुजारियों से आग्रह किया कि वे अपने गांवों में स्वास्थ्य दूत की भूमिका निभाते हुए मलेरिया, टीबी, डेंगू, फाइलेरिया एवं अन्य मौसमी बीमारियों के प्रति जनजागरूकता फैलाएं, लोगों को समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करें तथा स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के बीच मजबूत सेतु बनकर कार्य करें।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी सिरहा, गुनिया, बैगा एवं माता-पुजारियों को सम्मानित कर उनके सामाजिक योगदान की सराहना की गई। उपस्थित सभी अतिथियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता को नई दिशा देंगे तथा स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के मध्य विश्वास एवं सहभागिता को और अधिक मजबूत बनाएंगे। इससे मलेरिया उन्मूलन, मौसमी बीमारियों की रोकथाम तथा शासन की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त होगी।

सम्मेलन में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष सिंह, बीपीएम राजकुमार राजवाड़े, खंड प्रशिक्षण एवं विस्तार अधिकारी शंकर प्रसाद सिंह, आरएमए अलीम अंसारी, मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर कृपाशंकर यादव, सुपरवाइजर जी.डी. रावत, बलभद्र सिंह, बीसी श्रीमती मीरा साहू, श्रीमती अंजना यादव, एसपीएस श्रीमती कौशल्या सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सम्मेलन में संबंधित क्षेत्र के सिरहा, गुनिया, बैगा एवं माता-पुजारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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