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मनचाहे जीवनसाथी की तलाश होगी पूरी, गुप्त नवरात्रि में आजमाएं ये उपाय, मां कात्यायनी की कृपा से जल्द बनेंगे शादी के योग!

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बहुत से लोगों के रिश्ते तय होने में कई दिक्कतें आती है। अगर आप भी इन लोगों से से एक हैं, जिनके विवाह में लगातार देरी हो रही है या रिश्ते तय होकर भी टूट जाते हैं, तो आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि आपके लिए एक अच्छा अवसर साबित हो सकता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान की गई विशेष पूजा और कुछ उपाय शीघ्र विवाह के योग बना सकते हैं। साथ ही योग्य जीवनसाथी मिलने के योग मजबूत होते हैं।

गुप्त नवरात्रि विशेष फलदायी

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि साधना और देवी आराधना का पर्व है। इन दिनों श्रद्धा से किए गए पूजन और उपाय मनोकामनाओं को पूरा करने में सहायक माने गए हैं। जिन युवक-युवतियों के विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए यह समय विशेष फलदायी माना गया है।

कब तक रहेगी गुप्त नवरात्रि?

इस साल आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से 23 जुलाई तक मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति या शुक्र कमजोर हों या बार-बार रिश्ते टूट रहे हों, उनके लिए यह समय खास माना जाता है।

मां कात्यायनी की करें पूजा

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में हर दिन शाम को मां कात्यायनी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद “कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरी” मंत्र की कम से कम एक माला का जाप करें। मान्यता है कि इससे शीघ्र विवाह के योग मजबूत होते हैं।

हल्दी की गांठ का उपाय

विवाह योग्य युवक और युवतियां नौ दिनों तक भगवान शिव और मां पार्वती को प्रतिदिन हल्दी की गांठ अर्पित करें। हल्दी शुभ और मांगलिक कार्यों का प्रतीक है। यह उपाय योग्य जीवनसाथी की कामना से किया जाता है।

दान और पाठ का महत्व

विवाह में लंबे समय से रुकावट आ रही है तो दुर्गा सप्तशती के अर्गला स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। साथ ही पंचमी या अष्टमी तिथि पर सुहागन महिला या देवी मंदिर में सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी, लाल चुनरी और अन्य शृंगार सामग्री का दान करने की भी परंपरा है। इससे राहु-केतु के अशुभ प्रभाव और मांगलिक दोष कम होने की मान्यता है।

कलावे का विशेष उपाय

गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन भगवान शिव और मां पार्वती के विग्रह पर कलावा सात बार लपेटकर प्रतीकात्मक गठबंधन किया जाता है। इसके बाद शीघ्र विवाह की प्रार्थना की जाती है। इस उपाय से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

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