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एमसीबी में 27 शिक्षकों पर ‘डबल ड्यूटी’ का बोझ,स्कूल में पढ़ाएं या छात्रावास संभालें ,आदेश पर उठे सवाल

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एमसीबी:  मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक प्रशासनिक निर्णय चर्चा का विषय बन गया है। जिले में 27 शिक्षकों को उनके नियमित अध्यापन कार्य के साथ आदिवासी छात्रावासों और आश्रमों के अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस फैसले को लेकर शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय और शासन की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। राज्य शासन लगातार यह निर्देश देता रहा है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखकर उन्हें केवल शिक्षण कार्य में लगाया जाये ताकि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर हो सके। इसी उद्देश्य से विभिन्न विभागों में शिक्षकों के संलग्नीकरण भी समाप्त किये गये हैं। ऐसे में एमसीबी में शिक्षकों को अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपे जाने से विरोधाभासी स्थिति बन गई है।

जानकारी के अनुसार जिले में छात्रावास अधीक्षकों की कमी को देखते हुए 27 शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। हालांकि कई मामलों में संबंधित छात्रावास शिक्षकों के स्कूल से 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित बताये जा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक स्कूल में अनिवार्य उपस्थिति दर्ज कराने वाले शिक्षक छात्रावासों की नियमित निगरानी, विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक कार्यों का निर्वहन कैसे करेंगे।

वर्तमान व्यवस्था के तहत शिक्षकों को विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप के माध्यम से लोकेशन आधारित ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होती है। ऐसे में एक ही समय में दो अलग-अलग स्थानों की जिम्मेदारी निभाने की व्यवहारिकता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।इस पूरे मामले पर एमसीबी कलेक्टर संतन देवी जांगड़े का कहना है कि जिले में छात्रावास अधीक्षकों के पर्याप्त पद रिक्त हैं। इसी कारण वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में आसपास पदस्थ शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है ताकि छात्रावासों की व्यवस्थाएं प्रभावित ना हों। उनके अनुसार यह व्यवस्था आवश्यकता के आधार पर की गई है और शिक्षक समय-समय पर छात्रावासों की निगरानी करेंगे वहीं जिला शिक्षा अधिकारी रविकांत यादव का बयान अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है। उनका कहना है कि जिले में सभी प्रकार के संलग्नीकरण समाप्त कर दिए गए हैं तथा शिक्षकों को छात्रावास अधीक्षक का नया प्रभार दिए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है। अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयानों ने प्रशासनिक समन्वय पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

इस बीच जिले में यह चर्चा भी तेज है कि पिछले कई वर्षों से कुछ चुनिंदा शिक्षकों को ही बार-बार छात्रावासों की जिम्मेदारी क्यों सौंपी जाती रही है। पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।गौरतलब है कि पिछले वर्ष एमसीबी जिला 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों में प्रदेश के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल रहा था। ऐसे समय में जब शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों की स्कूलों में नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है तब उन पर अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां डालना कितना उचित है। यह बहस का विषय बन गया है।
अब देखना यह होगा कि शासन और उच्च प्रशासन इस आदेश की समीक्षा करता है या फिर शिक्षकों को स्कूल और छात्रावास दोनों की जिम्मेदारियां एक साथ निभानी पड़ेंगी।

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