अनीता गर्ग अमन पथ ब्यूरो चीफ रायगढ़ /धरमजयगढ़ : दुर्गापुर-2 कोयला खदान के लिए 4144 एकड़ भूमि अधिग्रहण का मामला एक बार फिर विवादों में फंस गया। रविवार को मां अंबे परिसर में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में न तो ड्रोन सर्वे पर सहमति बन सकी और न ही मुआवजे को लेकर कोई ठोस निर्णय हो पाया।
बैठक में क्या हुआ
S.E.C.L. रायगढ़ के महाप्रबंधक श्री एलेंडर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि, राजस्व अधिकारी और दुर्गापुर-2 से प्रभावित गांवों के सैकड़ों किसान मौजूद थे। कंपनी ने ड्रोन सर्वे के जरिए भूमि गणना कर प्रक्रिया तेज करने का प्रस्ताव रखा, जिसे जिला प्रशासन से सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। लेकिन किसान मुआवजे और रोजगार के मुद्दे पर अड़े रहे।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों में तीखी नोक-झोंक हुई। अंत में GM ने स्पष्ट किया – “भूमि नहीं मिलेगी तो खदान का संचालन संभव नहीं है।”
10 साल से लंबित है अधिग्रहण
उल्लेखनीय है कि उक्त भूमि का अधिग्रहण C.B. Act की धारा-11 के तहत फरवरी 2016 में ही हो चुका है। नियमानुसार अब इस पर कंपनी का पूर्ण अधिकार है। इसके बाद भी पिछले एक दशक से अधिग्रहण की प्रक्रिया धारा 21-22 तक ही पहुंच पाई है।
कंपनी सूत्रों के अनुसार राजस्व, वन और शासकीय भूमि का मुआवजा लगभग अंतिम चरण में है। वहीं किसानों का प्रतिनिधिमंडल लगातार बाजार भाव के अनुसार मुआवजा और प्रति परिवार एक नौकरी की मांग कर रहा है।
स्थानीय परिप्रेक्ष्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में मामला लटक रहा है। किसानों का तर्क है कि खेती प्रभावित होने से रोजगार का संकट बढ़ा है। उनका कहना है कि यदि समय पर अधिग्रहण हो जाता तो युवाओं को रोजगार मिलता और कृषि हानि से भी बचाव होता।
अब जिला प्रशासन और S.E.C.L. के संयुक्त प्रयासों पर ही निर्भर है कि यह 10 साल पुराना विवाद कब सुलझता है।
– कुल भूमि: 4144 एकड़ – दुर्गापुर-2 खदान
– अधिग्रहण की तिथि: फरवरी 2016, धारा-11 C.B. Act
– वर्तमान स्थिति: धारा 21-22 की प्रक्रिया जारी



