कार्यक्रम का शुभारंभ चंदन एवं आम के पौधों का रोपण कर किया गया।
काव्य कलश परिवार द्वारा सक्ती के वरिष्ठ कवि नरेन्द्र वैष्णव ‘सक्ती’ का मोमेंटो भेंटकर सम्मानित किया गया।
सक्ती। काव्य कलश कला एवं साहित्य मंच द्वारा आयोजित पर्यावरण पखवाड़ा का प्रथम दिवस श्रद्धा, साहित्य और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ माँ वैष्णो देवी मंदिर प्रांगण उल्दा में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ चंदन एवं आम के पौधों का रोपण कर किया गया। उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रद्धालुओं ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के संरक्षक वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय मनमोहन सिंह ठाकुर ने की। विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में आदरणीय नरेन्द्र कुमार वैष्णव एवं महाराज टंकेश्वर मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। यदि आज वृक्षों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में मानव जीवन गंभीर संकटों का सामना करेगा।
पौधरोपण के पश्चात पर्यावरण विषय पर आधारित एक प्रभावशाली काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति, जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। काव्य पाठ ने उपस्थित श्रोताओं को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने तथा प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा दी।कार्यक्रम में मंच के उपाध्यक्ष राकेश नारायण बंजारे, सचिव महेंद्र कुमार राठौर, गोष्ठी प्रभारी लखन लाल राठौर ‘कौशल’, लव गुप्ता सहित मंच के सदस्य, साहित्यप्रेमी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन काव्य कलश कला एवं साहित्य मंच की अध्यक्ष प्रियंका गुप्ता ‘प्रिया’ ने किया। अंत में मंच के संस्थापक पुरुषोत्तम गुप्ता ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की एक विशेष आकर्षण यह रही कि ग्राम पचरी सारागांव निवासी मनीष कुमार पाण्डेय, जो वर्तमान में नीदरलैंड में कार्यरत हैं, अपने पूरे परिवार के साथ काव्य गोष्ठी में शामिल हुए। उन्होंने अपनी प्रभावशाली काव्य प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं को प्रभावित किया तथा काव्य कलश परिवार के आयोजन की मुक्तकंठ से सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने मंच की गतिविधियों से प्रभावित होकर भविष्य में काव्य कलश परिवार से सक्रिय रूप से जुड़ने की अपनी इच्छा भी व्यक्त की।



