Home ज्योतिष सावन में शिवलिंग पर शृंगी से जल चढ़ाने का क्या है महत्व?...

सावन में शिवलिंग पर शृंगी से जल चढ़ाने का क्या है महत्व? पढ़ें पौराणिक मान्यता

0

भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है, खासकर सावन के महीने में। इस दौरान श्रद्धालु शिवलिंग का जल, दूध आदि पवित्र सामग्री से अभिषेक कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। रुद्राभिषेक के दौरान शृंगी से शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है। ऐसी मान्यता है कि शृंगी से जल अर्पित करने से यह अनुष्ठान अधिक फलदायी होता है। तो चलिए जानते हैं कि शृंगी क्या है, आखिर क्यों रुद्राभिषेक में इसका विशेष महत्व है।

शृंगी क्या है? 

शृंगी पूजा-अर्चना में इस्तेमाल होने वाला एक विशेष पात्र है, जिसका आकार पशु के सींग जैसा होता है। इसे आमतौर पर तांबे, पीतल या चांदी जैसी धातुओं से बनाया जाता है। रुद्राभिषेक के दौरान इसी पात्र से शिवलिंग पर लगातार जलधारा प्रवाहित की जाती है।

शृंगी से जल चढ़ाने का महत्व

शृंगी से निकलने वाली जलधारा बिना रुके सीधे शिवलिंग तक पहुंचती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यही निरंतर जलधारा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। कहा जाता है कि इस विधि से किया गया जलाभिषेक पूजा के प्रभाव को बढ़ाता है और साधक को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

 रुद्राभिषेक 

रुद्राभिषेक अनुष्ठान महादेव को प्रसन्न करने का सरल और प्रभावी उपाय बताया है। इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रों के साथ शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और अन्य पवित्र सामग्रियों से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

शिव के प्रिय नंदी और शृंगी से जुड़ी मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के परम भक्त नंदी ने शृंगी को भगवान शिव को भेंट किया था। इसके बाद भगवान शिव ने इसे अपने अभिषेक के लिए प्रिय पात्र के रूप में स्वीकार किया। तभी से रुद्राभिषेक में शृंगी का उपयोग विशेष महत्व रखने लगा और इस अनुष्ठान का अहम हिस्सा माना जाने लगा।

रुद्राभिषेक में शृंगी का प्रयोग करना शुभ होता है, लेकिन यह उपलब्ध न हो, तो तांबे के लोटे या किसी अन्य स्वच्छ पात्र से भी जल चढ़ा सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि जलधारा लगातार शिवलिंग पर गिरती रहे।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here