हरिद्वार में 12 दिवसीय कांवड़ मेले के समापन के बाद शहर के घाटों, सड़कों और कांवड़ पटरी पर बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो गया. इस बार करीब पौने 5 करोड़ से अधिक कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने का दावा किया गया है. गंगाजल लेकर लौटे कांवड़िये कई जगह जूते-चप्पल, गंदे कपड़े, फटे बैग, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य सामान छोड़ गए. पूरे मेले के दौरान शहर में करीब 7000 मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा हुआ, जिसमें करीब 4500 मीट्रिक टन कचरा गंगा घाटों के आसपास एकत्र हुआ. मेला खत्म होते ही नगर निगम, जिला प्रशासन और सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं ने विशेष सफाई अभियान शुरू कर दिया.
मेला खत्म होते ही शुरू हुआ सफाई अभियान:- कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद हरिद्वार में सफाई व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बन गई. हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर कांवड़ियों की भारी भीड़ के कारण नियमित सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई. जगह-जगह कूड़े के ढेर नजर आने लगे. मेला खत्म होने की रात से ही नगर निगम की टीमें सफाई में जुट गईं. करीब 1000 कर्मचारियों ने देर रात तक हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों की सफाई की. गंगा सभा के कर्मचारी और पदाधिकारी भी सफाई अभियान में शामिल रहे. प्रशासन का लक्ष्य था कि अगले दिन होने वाली गंगा आरती से पहले हरकी पैड़ी क्षेत्र को पूरी तरह साफ कर दिया जाए. कर्मचारियों की मेहनत से आरती से पहले घाटों को काफी हद तक साफ कर दिया गया.
धार्मिक संस्थाओं ने भी संभाली सफाई की जिम्मेदारी:- सफाई अभियान में धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. शांतिकुंज के कार्यकर्ताओं ने घाटों और आसपास के क्षेत्रों में सफाई की. साधु-संतों ने भी गंगा घाटों की सफाई में भाग लिया. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने भी सफाई अभियान में हिस्सा लेने वाली संस्थाओं की सराहना की. उन्होंने कांवड़ियों से अपील की कि अगली बार जब वे हरिद्वार आएं तो अपने साथ लाया सामान वापस लेकर जाएं और प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें.
गंगा और हरिद्वार को साफ रखने की चुनौती:- कांवड़ मेले में हर साल करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं. इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से सफाई व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है. इस बार भी यही स्थिति देखने को मिली. प्रशासन ने मेला खत्म होते ही बड़े स्तर पर सफाई अभियान शुरू कर दिया, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में जमा कचरे को हटाना अपने आप में बड़ी चुनौती रहा. अब प्रशासन के सामने सिर्फ कचरा हटाने की नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान कचरा कम करने की चुनौती भी है. इसके लिए श्रद्धालुओं को जागरूक करने, प्लास्टिक का इस्तेमाल रोकने और कचरा निर्धारित स्थान पर डालने की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है. हरिद्वार की स्वच्छता के साथ गंगा की स्वच्छता भी सीधे तौर पर जुड़ी है, इसलिए श्रद्धालुओं और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी अहम हो जाती है.



