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हरियाली तीज पर इस पूजा विधि और सामग्री से करें पूजन, जीवन में नहीं आएगी कोई बाधा!

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सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है. पूरे देश में कल यानी शनिवार को हरियाली तीज का व्रत रखा जाएगा. यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास माना जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करने से जीवन में सुख और शांति आती है. इस व्रत को पूरे नियम और श्रद्धा के साथ रखना चाहिए. सही समय पर पूजा करने से हर इच्छा पूरी होती है. जो महिलाएं इस पावन अवसर पर नियमपूर्वक व्रत रखकर पूजन संपन्न करती हैं, उनके दांपत्य जीवन में हमेशा प्रेम बना रहता है. सही विधि से किया गया पूजन जीवन में खुशहाली लाता है.

हरियाली तीज व्रत की मुख्य सामग्री:- हरियाली तीज की पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एक जगह एकत्र कर लेना चाहिए. इस पावन दिन माता पार्वती को अर्पित करने के लिए सुहाग की सामग्री जैसे मेहंदी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, रोली और लाल चुनरी की आवश्यकता होती है. इसके साथ ही भगवान शिव के पूजन के लिए जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और शमी पत्र की व्यवस्था करनी चाहिए. पूजा के स्थान को सजाने के लिए ताजे फूल, फल और पहनने के लिए हरे रंग के वस्त्र रखे जाते हैं. दीपक जलाने के लिए शुद्ध देसी घी, धूप, अक्षत और रुई की बाती की आवश्यकता होती है. भगवान को भोग लगाने के लिए शुद्ध मिठाई और फल रखे जाते हैं. सही सामग्री के साथ पूजा की तैयारी करने से मन में शांति बनी रहती है

व्रत रखने और पूजन की सही विधि:- हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इस पावन अवसर पर हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनना बहुत उत्तम माना जाता है. महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करती हैं. शाम के समय पूजा के स्थान पर लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है. इसके बाद चौकी पर शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करके पूरे भाव से उनका ध्यान किया जाता है. शांत मन से पूजा स्थल पर बैठकर ईश्वर का स्मरण करने से घर का वातावरण पवित्र होता है. पूरी निष्ठा से नियम का पालन करते हुए पूजा की शुरुआत की जाती है.

पूजन संपन्न करने और आरती का नियम:- पूजन के दौरान भगवान शिव को जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं तथा माता पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाया जाता है. इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर शांत मन से बैठना चाहिए. पूजा के समय हरियाली तीज की पावन कथा सुनना या पढ़ना बहुत जरूरी माना गया है. कथा पूरी होने के बाद पूरे भक्ति भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की आरती जाती है और उन्हें मिठाई का भोग लगाया जाता है. पूजन पूरी तरह संपन्न होने के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लिया जाता है. पूरे नियम और श्रद्धा से की गई यह पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आती है.

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