मालीडीह हल्का नंबर 7 में पटवारी के संदिग्ध तबादले पर पूर्व जिपं सभापति अमर चंद्राकर की तीखी प्रतिक्रिया
शासन बताए हर 3-4 महीने में इन्हीं 15 पटवारियों का क्यों किया जाता है तबादला
महासमुंद : राजस्व विभाग की कार्यशैली एक बार फिर कठघरे में है। अनुविभागीय अधिकारी महासमुंद द्वारा 06 अगस्त 2026 को जारी आदेश क्रमांक 221 के तहत पटवारी हल्का नंबर 7 मालीडीह में कार्यरत तरुण चंद्राकर को हटाकर 120 किमी दूर तहसील सरायपाली से सागर गिरी गोस्वामी को यहां पदस्थ किया जाना किसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। यह कौवाझर क्षेत्र के निस्तारी तालाब की कैफियत को मिटाने, सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को वैधता देने और भू-माफिया को संरक्षण देने की सोची-समझी साजिश है। पूर्व जिला पंचायत सभापति अमर अरुण चंद्राकर ने इस तबादले को लोकतंत्र और पारदर्शिता पर सीधा हमला बताते हुए राजस्व विभाग के अधिकारियों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्व नियमों के अनुसार एक हल्का पटवारी का तबादला 3 से 4 साल में एक बार किया जाना चाहिए। लेकिन विभाग ने हाल ही में 15 पटवारियों की सूची जारी कर 3 से 4 महीने के भीतर ही उनका बार-बार तबादला कर दिया। मालीडीह इसका सबसे बड़ा प्रमाण है, जहां बीते एक साल में तीन पटवारी बदले जा चुके हैं। जिस गति से यहां अधिकारियों को बदला जा रहा है उससे साफ है कि विभाग जनता की सेवा के लिए नहीं बल्कि किसी विशेष वर्ग के हित साधने के लिए काम कर रहा है। स्थानीय पटवारी को हटाकर बाहरी अधिकारी लाने के पीछे एकमात्र उद्देश्य दस्तावेजों में हेरफेर करना और कौवाझर के निस्तारी तालाब की भूमि से संबंधित अभिलेखों को बदलना है।
श्री चंद्राकर ने आरोप लगाया कि कौवाझर क्षेत्र में भू-माफिया पूरी तरह सक्रिय हैं और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ उनकी सीधी साठगांठ है। इसी गठजोड़ के चलते सरकारी तालाबों, चारागाह और सार्वजनिक भूमि को भू माफियाओं को सौंपने का खेल चल रहा है। जब कोई ईमानदार पटवारी इस गोरखधंधे में बाधा बनता है तो उसे रातों-रात हटाकर दूर दराज से ऐसे अधिकारी लाए जाते हैं जो विभाग और माफिया के इशारे पर काम करें। यह तबादला भी उसी कड़ी का हिस्सा है।
अमर ने राजस्व विभाग से सीधा सवाल किया कि आखिर यह तबादला किसके दबाव में किया गया है। क्या विभाग ने अपनी निष्पक्षता बेच दी है। इस प्रकार के तुगलकी फरमान से न केवल शासन की साख गिर रही है। बल्कि आम किसान और गरीब का शासन से भरोसा भी टूट रहा है। राजस्व विभाग को तुरंत स्पष्ट करना होगा कि वह जनता के साथ है, या भू-माफिया के।



