महासमुंद : जीव जंतु कल्याण बोर्ड छग शासन के उपाध्यक्ष व कांग्रेस के प्रदेश संयुक्त महामंत्री आलोक चंद्राकर ने स्कूलों के जर्जर हालत को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार शिक्षा के मामले में पूरी तरह फेल हो चुकी है। डबल इंजन की सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है लेकिन प्रदेश के स्कूलों की हालत चीख-चीख कर सरकार की नाकामी बता रही है। महासमुंद जिले सहित पूरे प्रदेश के अनेक ग्रामीण अंचल के स्कूलों की हालत खराब है। आज सैकड़ों स्कूलों में बच्चे जर्जर और खस्ताहाल भवनों में अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं। कहीं छतों से पानी टपक रहा है, कहीं दीवारें दरक रही हैं और कहीं शौचालय तक इस्तेमाल लायक नहीं बचे हैं। तीन महीने का नया सत्र बीत गया लेकिन सरकार को अब तक होश नहीं आया।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के नाम पर भाजपा सरकार ने केवल विज्ञापनबाजी की है। कागजों पर करोड़ों रुपये की स्वीकृति दिखाई जा रही है, अतिरिक्त कक्ष और मरम्मत के बड़े-बड़े आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। ग्रामीण अंचलों के अधिकांश स्कूलों में आज भी कमरों की भारी कमी है। एक ही कमरे में दो-दो तीन-तीन कक्षाएं एक साथ चल रही हैं। बारिश के दिनों में हालात और बदतर हो जाते हैं। कई जगह बच्चों को पंचायत भवन या अन्य वैकल्पिक स्थानों में ठूंस कर बैठाया जा रहा है। जिन स्कूलों को नया भवन मिला भी है वहां पुरानी जर्जर बिल्डिंग को गिराने की किसी को सुध नहीं है। बच्चे उसी खंडहर के आसपास खेलते और पढ़ते हैं। शिक्षक हर पल इस डर में रहते हैं कि कब कोई अनहोनी हो जाए।
आलोक ने कहा कि यह सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देने का नाटक करती है लेकिन हकीकत में शिक्षा का बजट विज्ञापन, आयोजन और नेताओं के प्रचार में उड़ा दिया जा रहा है। स्कूलों की मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक दौड़ रही हैं लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा। सरकार के पास आंकड़े बहुत हैं पर इच्छाशक्ति शून्य है। जिस सरकार को बच्चों के सुरक्षित भविष्य की चिंता नहीं वो प्रदेश को विकसित और समृद्ध बनाने का दावा कैसे कर सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह तत्काल प्रदेश के सभी जर्जर स्कूल भवनों की पहचान कर युद्धस्तर पर मरम्मत और नए भवन निर्माण का काम शुरू करे। शिक्षा के लिए आवंटित राशि को सही समय पर और पारदर्शी तरीके से खर्च किया जाए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई हो। बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो किसी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता। भाजपा सरकार को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होंगी। शिक्षा में सुधार के बिना छत्तीसगढ़ का विकास संभव नहीं है।



