Home छत्तीसगढ़ टीकाकरण दिवस पर ड्यूटी से गायब, निजी क्लीनिक में इलाज का आरोप

टीकाकरण दिवस पर ड्यूटी से गायब, निजी क्लीनिक में इलाज का आरोप

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स्वास्थ्य पर्यवेक्षक लालजी राठौर को कारण बताओ नोटिस, कार्रवाई की असली तस्वीर अब भी धुंधली

अनीता गर्ग अमन पथ ब्यूरो रायगढ़  :  जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत हाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्वास्थ्य पर्यवेक्षक लालजी राठौर पर टीकाकरण दिवस जैसी महत्वपूर्ण ड्यूटी से अनुपस्थित रहकर निजी क्लीनिक में मरीजों का इलाज करने का गंभीर आरोप लगा है।

मामला तब सामने आया जब यह बताया गया कि जिस दिन स्वास्थ्य केंद्र में टीकाकरण गतिविधि निर्धारित थी, उस दिन सुबह 11:10 बजे श्री राठौर एक निजी क्लीनिक में मरीजों का इलाज करते देखे गए। इसके महज 8 मिनट बाद *11:18 बजे* उन्होंने ड्यूटी से छुट्टी के लिए आवेदन BMO के व्हाट्सऐप पर भेजा।

CM पोर्टल पर भी शिकायत

इस लापरवाही की शिकायत पहले स्थानीय स्तर पर की गई। इसके बाद मुख्यमंत्री जन शिकायत निवारण पोर्टल CM Helpline में भी आवेदन किया गया। शिकायत के बाद खंड चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी धरमजयगढ़ द्वारा श्री राठौर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

सवालों के घेरे में विभागीय प्रक्रिया

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि छुट्टी लेनी थी तो आवेदन पहले क्यों नहीं किया गया? और जिस समय वे निजी क्लीनिक में थे उस समय उनकी शासकीय ड्यूटी की क्या स्थिति थी? छत्तीसगढ़ सिविल सेवा अवकाश नियम 2010 के अनुसार अवकाश की स्वीकृति पहले जरूरी होती है। केवल आवेदन भेज देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

सूत्रों का कहना है कि विभाग को यह भी जांचना होगा कि क्या श्री राठौर को निजी क्लीनिक में कार्य करने की कोई विभागीय अनुमति प्राप्त है या नहीं। सरकारी सेवा में रहते हुए निजी प्रैक्टिस के नियमों का उल्लंघन भी जांच का विषय है।

टीकाकरण दिवस पर अनुपस्थिति गंभीर

स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि टीकाकरण दिवस पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति सबसे जरूरी होती है। ऐसे में ड्यूटी से अनुपस्थिति सीधे आम जनता की स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी है।

फिलहाल मामला कारण बताओ नोटिस तक पहुंचा है। अब निगाहें इस पर हैं कि श्री राठौर अपने स्पष्टीकरण में क्या जवाब देते हैं और विभाग उस पर क्या कार्रवाई करता है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सवाल सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसमें मरीज सरकारी अस्पताल में डॉक्टर का इंतजार करता है और कर्मचारी की मौजूदगी कहीं और बताई जाती है।

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