11:10 बजे कथित निजी उपचार, 11:18 बजे अवकाश आवेदन; शिकायत में वीडियो, लेकिन जांच में सिर्फ कर्मचारी का जवाब!
अनीता गर्ग अमन पथ ब्यूरो चीफ रायगढ़ : धरमजयगढ़ विकासखंड के हाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सुपरवाइजर लालजी राठौर से जुड़ा मामला अब स्वास्थ्य विभाग और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार 11 अगस्त 2026 को करीब 11:10 बजे संबंधित कर्मचारी को अपने घर पर कथित रूप से मरीजों का उपचार करते देखा गया। शिकायत में इसका वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। इसके करीब 11:18 बजे संबंधित कर्मचारी द्वारा व्हाट्सऐप के माध्यम से अवकाश का आवेदन भेजे जाने की बात सामने आई।सवाल यह है कि यदि 11:10 बजे कर्मचारी घर पर मरीज देख रहे थे और 11:18 बजे घरेलू कार्य के कारण अवकाश का आवेदन किया गया, तो अवकाश पहले क्यों नहीं लिया गया? क्या इस पूरे घटनाक्रम का ड्यूटी अभिलेख और उपस्थिति पंजिका से मिलान किया गया?
निजी क्लीनिक था तो पंजीयन कहां?
शिकायत में केवल अनुपस्थिति नहीं, बल्कि घर पर कथित निजी क्लीनिक खोलकर मरीजों का उपचार करने की बात भी कही गई है। यदि यह उपचार नियमों के तहत हो रहा था तो उस प्रतिष्ठान का पंजीयन क्रमांक, नाम और वैध अनुमति क्या है? घर पर मरीज देखने और दवाइयां देने की अनुमति किस आधार पर है? खासकर बच्चों का उपचार और दवा वितरण किस वैधानिक अधिकार के तहत किया जा रहा था?
यदि यह निजी चिकित्सा केंद्र नियमसम्मत नहीं था तो स्वास्थ्य विभाग और संबंधित औषधि अधिकारियों ने इसकी जांच क्यों नहीं की? और यदि नियमसम्मत था तो उसका पंजीयन सार्वजनिक क्यों नहीं है?
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का जवाब भी सवालों में
मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तक पहुंचा। शिकायतकर्ता को संदेश मिला कि निराकरण की पुष्टि के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क स्थापित नहीं हो सका। इसके बाद आगे की जानकारी के लिए हेल्पलाइन से संपर्क करने को कहा गया।लेकिन 17 अगस्त 2026 के खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, धरमजयगढ़ के पत्र में शिकायत के संबंध में बताया गया कि 13 अगस्त को संबंधित कर्मचारी को नोटिस दिया गया और 14 अगस्त को उसके द्वारा जवाब प्रस्तुत किया गया। जवाब में कर्मचारी ने घर पर प्रैक्टिस से इनकार करते हुए 11 अगस्त को घरेलू कार्य के कारण अवकाश पर रहने की बात कही।
अब रहस्य यही है—मुख्यमंत्री हेल्पलाइन ने संपर्क करने का प्रयास किस अधिकारी ने किया? किस नंबर से किया? कितनी बार किया? संपर्क क्यों नहीं हुआ? और क्या शिकायतकर्ता से संपर्क किए बिना ही शिकायत का निराकरण मान लिया गया?
मौके की जांच हुई तो पंचनामा और गवाह कहां?शिकायतकर्ता स्वयं साक्षी होने और वीडियो उपलब्ध कराने की बात कह रहा है। ऐसे में यदि वास्तविक भौतिक जांच हुई तो क्या अधिकारी संबंधित कर्मचारी के घर पहुंचे? क्या कथित निजी क्लीनिक की जांच की गई? क्या आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ हुई? क्या पंचनामा बनाया गया? क्या शिकायतकर्ता का बयान लिया गया? और वीडियो साक्ष्य की जांच किस आधार पर की गई?
जांच रिपोर्ट में इन सवालों का स्पष्ट उल्लेख दिखाई नहीं देता। वहां मुख्य रूप से नोटिस और कर्मचारी के जवाब का उल्लेख है।यही वजह है कि सवाल उठ रहा है कि शिकायत की जांच हुई या केवल शिकायत का कागजी निराकरण?मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम नागरिक की शिकायत को समाधान तक पहुंचाने के लिए है। यदि शिकायतकर्ता से संपर्क ही नहीं हुआ, मौके की जांच स्पष्ट नहीं है और उपलब्ध वीडियो साक्ष्य का परीक्षण सामने नहीं आया, तो जनता यह जानना चाहेगी कि शिकायत का वास्तविक समाधान आखिर हुआ कहां?सरकार को अब सिर्फ जवाब नहीं, जांच का आधार बताना चाहिए। क्योंकि शिकायत नंबर मिलना समाधान नहीं और कर्मचारी का जवाब लेना पूरी जांच नहीं।
मामला केवल एक कर्मचारी की अनुपस्थिति का नहीं, बल्कि जांच की पारदर्शिता और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की विश्वसनीयता का है। यदि शिकायत में वीडियो साक्ष्य है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो, शिकायतकर्ता और ग्रामीणों के बयान लिए जाएं तथा कथित निजी क्लीनिक के पंजीयन व वैधता की जांच की जाए। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि शिकायत का समाधान वास्तव में हुआ है या केवल कागजों में। जनता को शिकायत नंबर नहीं, न्याय और कार्रवाई चाहिए।






