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विश्व फोटोग्राफी दिवस पर अनोखी पहल: हेलमेट रैली से सड़क सुरक्षा का संदेश, रक्तदान में ASP राकेश पाटनवार भी बने सहभागी; DIG-SSP डॉ. लाल उमेद सिंह की मौजूदगी में सम्मान समारोह

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कोमल ग्वाला अमनपथ ब्यूरो चीफ जशपुर कुनकुरी : तस्वीरें खींचना आसान है, लेकिन समाज के लिए एक अच्छी तस्वीर बनाना हर किसी के बस की बात नहीं। विश्व फोटोग्राफी दिवस पर कुनकुरी में जशपुर जिले के फोटोग्राफरों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। हाथों में कैमरे रखने वाले फोटोग्राफरों ने एक दिन कैमरे से आगे बढ़कर सड़क सुरक्षा और रक्तदान जैसे सामाजिक मुद्दों को अपना विषय बनाया।होटल अतिशय में आयोजित कार्यक्रम में फोटोग्राफी के उत्सव को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा गया। आयोजन की शुरुआत किसी औपचारिक कार्यक्रम से नहीं, बल्कि हेलमेट रैली से हुई। फोटोग्राफरों ने खुद हेलमेट पहनकर नगर भ्रमण किया और लोगों को संदेश दिया कि सड़क पर कुछ सेकंड की लापरवाही जिंदगी भर का दर्द बन सकती है।

इसके बाद कार्यक्रम ने उस समय खास संदेश दिया, जब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश पाटनवार स्वयं रक्तदान करने पहुंचे। उनके रक्तदान ने आयोजन में मौजूद लोगों के बीच सेवा भावना को और मजबूत किया। शिविर में करीब 20 लोगों ने रक्तदान कर जरूरतमंदों के जीवन के लिए अपना योगदान दिया।कार्यक्रम में डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह की मौजूदगी भी खास आकर्षण रही। मंच से फोटोग्राफर संघ ने विभिन्न लोगों को सम्मानित किया और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।

इस पूरे आयोजन की खास बात यही रही कि यहां फोटोग्राफी सिर्फ तस्वीरों तक सीमित नहीं रही। किसी ने सड़क पर सुरक्षा का संदेश दिया, किसी ने अपना रक्त देकर जिंदगी बचाने की पहल की और मंच से मेहनत करने वालों का सम्मान हुआ।जशपुर जिला फोटोग्राफर संघ के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह बेहरा (पत्थलगांव) और जिला उपाध्यक्ष शंकर चौहान (कुनकुरी) के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में फोटोग्राफरों ने यह संदेश दिया कि समाज की हर अच्छी पहल को कैमरे में कैद करने वाला व्यक्ति खुद भी समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक है।

एक तस्वीर जो कैमरे में नहीं, लोगों के दिल में कैद हुई
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर कुनकुरी में हुई यह पहल इसलिए यादगार बन गई, क्योंकि इस बार फोटोग्राफरों ने तस्वीरें सिर्फ खींची नहीं, बल्कि समाज के लिए एक तस्वीर गढ़ी। सड़क पर सुरक्षा और अस्पताल के लिए रक्तदान का संदेश देकर उन्होंने साबित किया कि कैमरे के पीछे खड़ा इंसान भी बदलाव की कहानी लिख सकता है।

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