संवाददाता अमनपथ राजूनाथ जोगी नगरी : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवाकेंद्र नगरी में रक्षाबंधन का पावन पर्व श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में भाई-बहनों ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व को समझते हुए परमात्मा स्मृति, पवित्रता और सकारात्मक जीवन का संकल्प लिया।
आयोजन में जिला धमतरी की इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी ने उपस्थित भाई-बहनों को आत्मस्मृति का दिव्य तिलक लगाकर परमात्मा स्नेह का रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान सेवाकेंद्र का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, प्रेम और भाईचारे से ओत-प्रोत रहा।
अपने आध्यात्मिक संबोधन में सरिता दीदी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने का पर्व नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक कमजोरियों और नकारात्मक विचारों से स्वयं की रक्षा करने का संकल्प लेने का अवसर है। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी विकारों से मुक्त होकर पवित्रता को जीवन में धारण करना ही सच्ची सुरक्षा है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की वास्तविक शक्ति बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि ईश्वर की याद, पवित्रता और आत्मबल में निहित है। यदि मन में शुभ संकल्प, सकारात्मक विचार और परमात्मा का स्मरण हो तो जीवन में सुख, शांति और संतुलन की अनुभूति बनी रहती है।
दीदी ने उपस्थितजनों से सुख, शांति, प्रेम, माधुर्यता, नम्रता और शुभ संकल्पों को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने आपसी प्रेम एवं सद्भाव के साथ रहने तथा समाज को नशामुक्त बनाने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने का संदेश भी दिया।
रक्षा सूत्र के साथ बंधा आत्म-संयम का संकल्प
कार्यक्रम में रक्षासूत्र को केवल भाई-बहन के रिश्ते की सुरक्षा का प्रतीक न मानकर आत्म-संयम, पवित्रता और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों का संकल्प सूत्र बताया गया। उपस्थित भाई-बहनों ने अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और समाज में प्रेम, शांति एवं सद्भाव का वातावरण बनाने का संकल्प लिया।
आध्यात्मिक संदेशों और रक्षासूत्र बांधने की रस्म के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण बना रहा। कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया कि बाहरी सुरक्षा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मन और विचारों की पवित्रता की रक्षा है। यही रक्षाबंधन के पर्व का वास्तविक आध्यात्मिक सार है।





