जगदलपुर : कभी घने जंगलों में AK-47 जैसे आधुनिक हथियारों के साथ घूमने वाले माओवादी, जो एक-दूसरे के लिए जान देने और जान लेने तक को तैयार रहते थे, आज एक-दूसरे से बिछड़ते वक्त भावुक नजर आए। कभी बंदूक के साए में जिंदगी बिताने वाले इन पूर्व माओवादियों की विदाई का दृश्य ऐसा था कि देखने वाला भी कुछ पल के लिए ठिठक जाए। एक-दूसरे को गले लगाकर रोते इन लोगों की तस्वीरों ने उनके जीवन के बदले हुए अध्याय की कहानी बयां कर दी।
गढ़चिरौली में हुआ पुनर्वास, अब घर लौट रहे पूर्व माओवादी
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। पिछले साल पूर्व माओवादी नेता वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। सुरक्षा कारणों के चलते इन्हें गढ़चिरौली के पुलिस पुनर्वास केंद्र में रखा गया था।
पुनर्वास के दौरान पूर्व माओवादियों को सामान्य जीवन की ओर लौटाने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए गए। कुछ को स्किल ट्रेनिंग दी गई, कई पूर्व माओवादियों के रिवर्स नसबंदी ऑपरेशन कराए गए, जबकि कुछ माओवादी जोड़ों ने शादी कर नई जिंदगी की शुरुआत की।
50 पूर्व माओवादी बस्तर के लिए रवाना
अब इसी पुनर्वास प्रक्रिया के तहत पूर्व माओवादियों को धीरे-धीरे उनके मूल गांव और जिलों में वापस भेजा जा रहा है। पहले चरण में 50 पूर्व माओवादियों को गढ़चिरौली से बस्तर के अलग-अलग जिलों में उनके गृहग्राम के लिए रवाना किया गया।
लेकिन रवाना होने से पहले का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। कभी जंगल में हथियार लेकर साथ चलने वाले ये लोग अब एक-दूसरे से बिछड़ने के गम में गले मिलकर रोते नजर आए। बंदूक और हिंसा से दूर सामान्य जिंदगी की ओर बढ़ते इन पूर्व माओवादियों की विदाई ने पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया का मानवीय पक्ष सामने ला दिया।
जम्पन्ना ने उठाए पुनर्वास प्रक्रिया पर सवाल
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया को लेकर पूर्व माओवादी नेता जिनुगु नरसिम्हा रेड्डी उर्फ जम्पन्ना ने सवाल भी उठाए हैं। प्रेस नोट जारी कर जम्पन्ना ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को लंबे समय तक पुलिस निगरानी वाले पुनर्वास केंद्र में रखने के बजाय, आत्मसमर्पण के बाद जल्द से जल्द उनके घर भेजा जाना चाहिए, ताकि वे सामान्य जिंदगी में वापस लौट सकें।
बंदूक से सामान्य जिंदगी तक का सफर
कभी जंगल और हथियारों से जुड़ी जिंदगी जीने वाले इन पूर्व माओवादियों का सफर अब बंदूक से सामान्य जीवन की ओर बढ़ रहा है। विदाई के वक्त एक-दूसरे को गले लगाकर छलके आंसू इस बदलाव की भावुक तस्वीर बन गए।
जिंदगी का रास्ता अब जंगल और बंदूक से नहीं, बल्कि परिवार, गांव और सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।




