नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना पश्चिमी राजस्थान में बड़े हवाई सैन्य अभ्यास की तैयारी कर रही है। इसके लिए 21 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक हवाई क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा सैन्य गतिविधियों के लिए रिजर्व किया गया है। जारी NOTAM के मुताबिक, इसमें जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर सेक्टर के साथ-साथ नाल-बीकानेर के आसपास का एयरस्पेस भी शामिल है।
आरक्षित हवाई क्षेत्र करीब 40,000 फीट की ऊंचाई तक फैला है और रिपोर्टों के अनुसार इसके कुछ हिस्से अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 20 किलोमीटर तक की दूरी पर हैं। ऐसे में भारत की इस हवाई गतिविधि पर पाकिस्तान की भी नजर है।
पाकिस्तान में बढ़ी हलचल, बुलाई गई आपात बैठक
भारतीय वायुसेना के इस लंबे NOTAM के बाद पाकिस्तान में सुरक्षा तंत्र की सक्रियता बढ़ने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों की बैठक बुलाकर भारतीय हवाई गतिविधियों की समीक्षा की।
वहीं, भारत-पाकिस्तान सीमा पर निगरानी भी बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, भारत की ओर से जारी NOTAM को सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए जारी किया गया हवाई क्षेत्र संबंधी नोटिस बताया जा रहा है।
‘वीर गार्जियन’ और ‘तरंग शक्ति’ से जुड़ी गतिविधियां
भारत के पश्चिमी क्षेत्र में होने वाली हवाई गतिविधियां ऐसे समय में हैं, जब भारतीय वायुसेना के दो बड़े अभ्यास प्रस्तावित हैं।
भारत और जापान के बीच ‘वीर गार्जियन 26’ अभ्यास सितंबर में आयोजित होना है। इसके बाद जोधपुर में बहुराष्ट्रीय ‘तरंग शक्ति 2026’ अभ्यास प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक तरंग शक्ति 26 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच आयोजित किया जाना है।
इन अभ्यासों में भारतीय वायुसेना के साथ मित्र देशों की वायुसेनाएं भी शामिल होंगी। इसका उद्देश्य संयुक्त अभियानों की क्षमता, आपसी तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी को बेहतर करना है।
40 हजार फीट तक रिजर्व एयरस्पेस
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू रिजर्व किया गया एयरस्पेस है। NOTAM के तहत निर्धारित क्षेत्र में सामान्य हवाई यातायात पर प्रतिबंध रहेगा, ताकि सैन्य उड़ानों और प्रशिक्षण गतिविधियों को सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा सके।
पश्चिमी राजस्थान का यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाकिस्तान सीमा के काफी करीब है। ऐसे में सितंबर के दौरान इस क्षेत्र में भारतीय लड़ाकू विमानों की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
क्या है युद्धाभ्यास का मकसद?
इस तरह के हवाई सैन्य अभ्यासों का मुख्य उद्देश्य वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी, पायलटों की क्षमता, तैनाती प्रक्रियाओं, आपसी तालमेल और युद्ध जैसी परिस्थितियों में प्रतिक्रिया क्षमता को परखना होता है।
अभ्यास के दौरान आधुनिक लड़ाकू विमानों के जरिए अलग-अलग हवाई अभियानों और जटिल युद्धाभ्यासों का प्रशिक्षण किया जाता है। भारतीय वायुसेना के लिए यह अभ्यास पश्चिमी सीमा के चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनल माहौल में अपनी तैयारियों को परखने का भी महत्वपूर्ण अवसर होगा।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में पाकिस्तान की ओर से बढ़ी निगरानी और आपात बैठक की बात सामने आई है, लेकिन इस NOTAM को अपने आप में किसी संभावित सैन्य कार्रवाई का संकेत मानना उचित नहीं होगा। यह मुख्य रूप से निर्धारित हवाई सैन्य गतिविधियों और अभ्यासों के लिए जारी किया गया नोटिस है।




