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‘अब कांग्रेस के बयानों में दम नहीं’, झीरम कांड पर मंत्री लखन देवांगन का बड़ा बयान, भूपेश पर भी निशाना

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस द्वारा जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाने और नार्को टेस्ट की मांग किए जाने के बीच उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया है।

गौरेला दौरे पर पहुंचे मंत्री देवांगन ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों में अब कोई दम नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि NIA देश की राष्ट्रीय और स्वायत्त जांच एजेंसी है, जिसने झीरम घाटी जैसे संवेदनशील मामले की जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की है।

मंत्री ने कहा कि जांच के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया है और अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अदालत द्वारा दोषियों को सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया भी निर्धारित है और 16 सितंबर को सजा का ऐलान किया जाना है।

‘जेब में चिट्ठा था तो 5 साल में क्यों नहीं खोला राज?’

मंत्री लखन लाल देवांगन ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान भूपेश बघेल कई बार यह दावा करते रहे कि झीरम कांड से जुड़े सबूत और कथित मुख्य षड्यंत्रकारियों का पूरा “चिट्ठा” उनकी जेब में है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब कांग्रेस करीब पांच साल तक प्रदेश की सत्ता में रही और भूपेश बघेल स्वयं मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने उस कथित चिट्ठे और सबूतों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया?

देवांगन ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए कांग्रेस सरकार इस मामले में कोई ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी और अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद कांग्रेस द्वारा सवाल उठाकर ध्यान भटकाने की राजनीति की जा रही है।

जांच एजेंसियों पर सवाल उठाना गलत: देवांगन

मंत्री ने कहा कि देश की प्रमुख जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक उद्देश्य से सवाल उठाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक NIA ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की और अब मामला न्यायालय के समक्ष है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का रुख स्पष्ट है कि अपराध में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। न्यायिक प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे बढ़ रही है और सरकार का उद्देश्य है कि झीरम घाटी जैसे गंभीर मामले में न्याय प्रक्रिया अपने तार्किक अंजाम तक पहुंचे।

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