सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
सातबाहना को पृथक ग्राम का दर्जा देने की मांग भी उठाई
संवाददाता अमनपथ राजूनाथ जोगी नगरी :सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और सतत प्रबंधन को लेकर मारागांव, मड़ेली, मोहेरा, हिर्रीडीह और सातबाहना की सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों ने मंगलवार को कलेक्टर को संयुक्त ज्ञापन सौंपा। समितियों ने ग्राम सभा द्वारा तैयार सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन कार्ययोजना को जिला स्तरीय प्रबंधन समिति के समक्ष प्रस्तुत कर आवश्यक परीक्षण, अनुमोदन एवं आगामी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत ग्राम सभा एवं अधिकारधारकों को सामुदायिक वन संसाधनों की रक्षा, संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रबंधन का अधिकार एवं दायित्व दिया गया है। इसी क्रम में समितियों द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं, वन संसाधनों के संरक्षण और आजीविका संवर्धन को ध्यान में रखते हुए सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की गई है।
समितियों ने मांग की कि कार्ययोजना का जिला स्तर पर आवश्यक परीक्षण कर अनुमोदन एवं आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रस्तावित गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के बीच आवश्यक समन्वय एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, ताकि सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वन संसाधनों का संरक्षण, संवर्धन एवं सतत प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। इसी संयुक्त ज्ञापन में पारा सातबाहना को पृथक ग्राम के रूप में मान्यता देने तथा स्वतंत्र ग्राम सभा गठित करने की मांग भी की गई। ग्रामीणों ने बताया कि सातबाहना एक अलग एवं पारंपरिक बस्ती है, जहां समुदाय लंबे समय से निवास कर अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक गतिविधियां संचालित करता आ रहा है। ग्रामीणों ने पेसा अधिनियम, छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए सातबाहना की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, पारंपरिक निवास, सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और समुदाय की सामूहिक इच्छा का परीक्षण कर इसे स्वतंत्र ग्राम के रूप में मान्यता देने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में मनोज साक्षी, प्रमोद कुंजाम, मोहनलाल, राकेश, हीरालाल नेताम, महेंद्र, हेमेंद्र, भुनेश्वरी कश्यप, दुलारी, गेवेंद्र, धनराज, बलीराम सहित अन्य ग्रामीण एवं समिति के पदाधिकारी शामिल रहे।




