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हौसलों के आगे दिव्यांगता हुई बौनी, समूह बनाकर शुरू किया दोना-पत्तल बनाने का कारोबार

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सिहावा क्षेत्र के दिव्यांगजनों ने दिखाई आत्मनिर्भरता की मिसाल, खुद मशीन खरीदकर रोजगार की राह पर बढ़ाया कदम

संवाददाता अमनपथ राजूनाथ जोगी नगरी : कहते हैं कि इंसान के सपनों को उसके शरीर की सीमाएं नहीं, बल्कि उसका हौसला पूरा करता है। इसी कहावत को साकार करते हुए सिहावा क्षेत्र के दिव्यांगजनों ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बढ़ाया है। इन दिव्यांगजनों ने स्वयं समूह बनाकर “उम्मीद दिव्यांग सेवा संस्थान” का गठन किया और दोना-पत्तल निर्माण का व्यवसाय शुरू कर अपने पैरों पर खड़े होने की नई राह चुनी है।संस्थान के सदस्यों ने शासन द्वारा दिए जाने वाले दोना-पत्तल निर्माण प्रशिक्षण का लाभ लिया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने यह ठान लिया कि शरीर में आई कमियों को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ना है। इसी सोच के साथ समूह के सदस्यों ओमप्रकाश मंडावी, रीना नेताम, कुशरी यादव, पार्वती नेताम एवं सुखमोती नेताम ने मिलकर दोना-पत्तल बनाने की मशीन खरीदी और व्यवसाय की शुरुआत की।

दोना-पत्तल निर्माण केंद्र का विधिवत शुभारंभ जनपद पंचायत अध्यक्ष महेश गोटा, नगर पंचायत अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा एवं सिहावा के प्रतिष्ठित व्यापारी शैलेंद्र धेनुसेवक के करकमलों से किया गया।

बलजीत छाबड़ा ने कहा— “उम्मीद के आगे दुनिया कायम है”
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा ने दिव्यांगजनों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि “उम्मीद के आगे दुनिया कायम है।” उन्होंने कहा कि सिहावा क्षेत्र के दिव्यांगजनों ने जिस साहस, मेहनत और व्यवसाय करने की लगन का परिचय दिया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। निश्चित रूप से मेहनत और हौसले के साथ यह समूह अपने व्यवसाय में सफलता हासिल करेगा।उन्होंने कहा कि धमतरी जिले के संवेदनशील कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा से मिलकर तथा समाज कल्याण विभाग से संपर्क कर इन दिव्यांगजनों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से यथासंभव सहयोग दिलाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि उनका यह छोटा प्रयास आगे चलकर एक मजबूत स्वरोजगार का रूप ले सके।

कलेक्टर अविनाश मिश्रा से सहयोग की उम्मीद
दिव्यांगजनों की इस पहल को आगे बढ़ाने में प्रशासनिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। ऐसे में कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा की संवेदनशील पहल और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से इस समूह को प्रशिक्षण, बाजार और अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का सहयोग इन हौसलों को नई उड़ान देने का माध्यम बन सकता है।

कमजोर समझे जाने वाले हाथों ने थामी रोजगार की बागडोर
कार्यक्रम के दौरान दिव्यांगजनों के चेहरों पर आत्मविश्वास और खुशी साफ दिखाई दे रही थी। उनके चेहरे की मुस्कान यह बता रही थी कि वे किसी पर आश्रित होकर नहीं, बल्कि अपने श्रम और हुनर के दम पर अपना भविष्य गढ़ना चाहते हैं।समाज में अक्सर दिव्यांगजनों को उनकी शारीरिक सीमाओं के आधार पर कमजोर समझ लिया जाता है, लेकिन इन पांच सदस्यों ने अपने प्रयास से यह साबित कर दिया कि कमजोरी शरीर में नहीं, सोच में होती है। जिन हाथों को कभी कमजोर समझा जाता था, आज उन्हीं हाथों ने रोजगार की बागडोर संभाल ली है।

जनपद अध्यक्ष महेश गोटा ने भी दिव्यांगजनों के इस साहसिक प्रयास की प्रशंसा करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।सिहावा क्षेत्र में शुरू हुई यह पहल केवल दोना-पत्तल बनाने का व्यवसाय नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की कहानी है। इन दिव्यांगजनों ने समाज को संदेश दिया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, यदि मन में उम्मीद और हौसला हो तो इंसान अपने लिए सफलता की राह स्वयं बना सकता है।

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