बदलती जीवनशैली के बीच कम उम्र में भी जोड़ों में दर्द, अकड़न और स्टिफनेस की शिकायत देखने को मिल रही है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी और लगातार बैठकर काम करने की आदत जोड़ों की जकड़न को बढ़ा सकती है। खासकर कई घंटों तक बिना हिले-डुले रहने के बाद उठने पर घुटनों, कमर या दूसरे जोड़ों में अकड़न महसूस हो सकती है।
आयुर्वेदिक डॉक्टर सलीम जैदी के अनुसार, डाइट में हल्दी और अदरक जैसे मसालों को शामिल करना सूजन और दर्द से जुड़ी परेशानियों में मददगार हो सकता है। हालांकि, लगातार या तेज दर्द को केवल घरेलू उपायों के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए।
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन हो सकता है फायदेमंद
हल्दी में करक्यूमिन नामक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जिसमें सूजनरोधी गुण होते हैं। इसी वजह से हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से शरीर में सूजन और दर्द से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है।
जोड़ों के दर्द के मामले में हल्दी से मिलने वाला संभावित लाभ मुख्य रूप से इसके करक्यूमिन से जुड़ा माना जाता है। हालांकि, हल्दी को किसी बीमारी का इलाज या कार्टिलेज को निश्चित रूप से नुकसान से बचाने वाला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।
अदरक भी दे सकता है राहत
अदरक में जिंजरोल समेत कई सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। इनमें सूजनरोधी गुण होते हैं और इसी कारण अदरक को दर्द और सूजन से जुड़ी कुछ स्थितियों में उपयोगी माना जाता है।
डाइट में सीमित मात्रा में अदरक शामिल करना सामान्य तौर पर आसान है। इसे चाय, सब्जियों या अन्य भोजन के साथ भी लिया जा सकता है।
हल्दी-अदरक का पानी कैसे बनाएं?
हल्दी और अदरक को एक साथ लेने के लिए एक आसान घरेलू तरीका अपनाया जा सकता है।
– एक कप पानी लें।
– इसमें करीब आधा चम्मच हल्दी डालें।
– अदरक का छोटा टुकड़ा कद्दूकस करके मिलाएं।
– पानी को कुछ देर गर्म करें।
– हल्का गुनगुना होने पर स्वाद के लिए थोड़ी मात्रा में शहद मिलाया जा सकता है।
– इसे सुबह सेवन किया जा सकता है।
हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति को इससे जोड़ों के दर्द में समान फायदा मिले। किसी विशेष बीमारी, दवा के सेवन या अन्य स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
सिर्फ मसालों पर निर्भर न रहें, रोज करें मूवमेंट
जोड़ों की अकड़न और स्टिफनेस को कम करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर कुछ कदम चलना और रोजाना वॉक करना मददगार हो सकता है।
नियमित हल्की गतिविधि से मांसपेशियों की सक्रियता बनी रहती है और जोड़ों की गतिशीलता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना, स्ट्रेचिंग और अन्य हल्की एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
अगर जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, गर्माहट, चलने में परेशानी या सुबह लंबे समय तक रहने वाली अकड़न हो, तो इसके पीछे गठिया या कोई अन्य समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।




