पीएम आवास की 1,409 प्रस्तावित अपात्र परिवारों की सूची पर 25 सितंबर तक दावा-आपत्ति, वहीं पूर्व में शासकीय ग्रुप में कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर उठे सवाल
बैकुंठपुर/कोरिया। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में पारदर्शिता और पात्रता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने एक ओर बैकुंठपुर और सोनहत जनपद पंचायत के कुल 1,409 प्रस्तावित अपात्र परिवारों की सूची सार्वजनिक कर 25 सितंबर तक दावा-आपत्ति आमंत्रित की है, वहीं दूसरी ओर इसी योजना से जुड़े शासकीय व्हाट्सऐप ग्रुप में पूर्व में सामने आई ‘भाड़ में जाए’ जैसी कथित टिप्पणी को लेकर प्रशासनिक संवेदनशीलता और शासकीय मर्यादा पर सवाल उठ चुके हैं। अब दोनों घटनाक्रम एक साथ चर्चा का विषय बन गए हैं।
1,139 बैकुंठपुर और 270 सोनहत परिवार सूची में
आवास प्लस-2024 के तहत सिस्टम जनरेटेड ड्राफ्ट प्रतीक्षा सूची का ग्राम सभाओं के माध्यम से सत्यापन कराया गया। सत्यापन के बाद चिन्हांकित अपात्र परिवारों की जानकारी आवास पोर्टल पर अपलोड की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत बैकुंठपुर के 1,139 तथा सोनहत के 270, कुल 1,409 परिवारों को प्रस्तावित अपात्र परिवारों के रूप में चिन्हांकित किया गया है।
इनकी अपात्रता पर अंतिम अनुमोदन जिला पंचायत स्तर पर गठित अपीलीय समिति की प्रक्रिया के तहत किया जाना है। प्रशासन ने सूची सार्वजनिक करते हुए प्रभावित परिवारों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
25 सितंबर तक मौका, दस्तावेजों के साथ दे सकते हैं आपत्ति
प्रस्तावित अपात्र परिवारों की सूची जिला प्रशासन की वेबसाइट और जिला पंचायत कोरिया के सूचना पटल पर उपलब्ध कराई गई है। सूची को लेकर किसी व्यक्ति को दावा या आपत्ति है तो वह संबंधित दस्तावेजों के साथ 25 सितंबर 2026 की शाम 5 बजे तक मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरिया के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
निर्धारित समय-सीमा के बाद प्राप्त दावा-आपत्तियों पर विचार नहीं किए जाने की बात प्रशासन ने कही है।
इसी योजना को लेकर पहले ‘भाड़ में जाए’ वाली कथित टिप्पणी ने खड़े किए थे सवाल
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े सचिवों के शासकीय व्हाट्सऐप ग्रुप का एक स्क्रीनशॉट पूर्व में सामने आया था, जिसमें ‘ज्यादा क्या दिमाग लगाना… बाकी मैं तो हूं। भाड़ में जाए’ जैसे शब्द लिखे होने का दावा किया गया था। स्क्रीनशॉट में ‘सचिव ग्रुप विकासखंड सोनहत’ नामक व्हाट्सऐप ग्रुप दिखाई देता है और संदेश एक ऐसे नंबर से जुड़ा बताया गया था, जिसे Manoj Singh Jagat नाम से सेव किया गया था।
इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारी की भाषा और शासकीय संवाद की मर्यादा पर सवाल उठे थे। हालांकि, वायरल स्क्रीनशॉट की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है, इसलिए टिप्पणी के वास्तविक लेखक और परिस्थितियों का अंतिम निर्धारण निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकता है।
गरीबों के घर से जुड़ी योजना, इसलिए भाषा और प्रक्रिया दोनों पर नजर जरूरी
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण क्षेत्र के जरूरतमंद और आवासविहीन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में पात्रता सूची से किसी परिवार का नाम बाहर होना उसके लिए गंभीर विषय हो सकता है। यही वजह है कि प्रशासन ने दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के जरिए प्रभावित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया है।
वहीं, योजना के क्रियान्वयन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए शासकीय संवाद में संयमित एवं मर्यादित भाषा का इस्तेमाल भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
अब सवाल—दावा-आपत्ति में पारदर्शिता के साथ पुराने मामले की जांच कब?
एक तरफ प्रशासन 1,409 प्रस्तावित अपात्र परिवारों को दावा-आपत्ति का अवसर देकर प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ योजना से जुड़े शासकीय व्हाट्सऐप ग्रुप में कथित अमर्यादित टिप्पणी का मामला अब भी चर्चा में है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जिला प्रशासन इस पुराने मामले की भी निष्पक्ष जांच कराकर यह स्पष्ट करेगा कि वायरल स्क्रीनशॉट में दिखाई दे रही टिप्पणी वास्तव में किस व्यक्ति द्वारा की गई थी? यदि जांच में संबंधित अधिकारी की भूमिका प्रमाणित होती है, तो क्या शासकीय आचरण के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी?
फिलहाल 25 सितंबर तक दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पर सबकी नजर है, वहीं कथित व्हाट्सऐप टिप्पणी को लेकर प्रशासन की अगली कार्रवाई का भी इंतजार किया जा रहा है।




