रायपुर : रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्रों में टाटा पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने इस प्रस्ताव के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर करने की जानकारी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनी को बिजली वितरण के क्षेत्र में प्रवेश देने से सार्वजनिक बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
दरअसल, टाटा पावर कंपनी लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) में याचिका क्रमांक 89/2026 दायर कर रायपुर जिले के रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्रों के लिए वितरण लाइसेंस मांगा है। आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक यह याचिका 16 जुलाई 2026 को दर्ज हुई थी।
आयोग ने इस मामले में आम लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां एवं सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। 1 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे आयोग के कार्यालय में याचिका पर सार्वजनिक सुनवाई निर्धारित की गई है।
435 करोड़ रुपये के निवेश पर उठाए सवाल
विकास उपाध्याय ने टाटा पावर के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी ने आवेदन में शुरुआती पांच वर्षों में प्रस्तावित क्षेत्र में मौजूदा बिजली वितरण नेटवर्क के समान नेटवर्क विकसित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से करीब 435 करोड़ रुपये के निवेश की जानकारी दी है।
उपाध्याय का दावा है कि इतनी राशि में पूरे क्षेत्र के लिए आवश्यक नए 33 केवी और 11 केवी सबस्टेशन तथा बिजली लाइनों का व्यापक नेटवर्क तैयार करना चुनौतीपूर्ण होगा। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में निजी कंपनी मौजूदा सरकारी बिजली ग्रिड के उपयोग की मांग कर सकती है।
हालांकि, ये बातें विकास उपाध्याय द्वारा टाटा पावर के प्रस्ताव को लेकर उठाई गई आपत्तियां और आशंकाएं हैं। इन पर अंतिम निर्णय नियामक प्रक्रिया के तहत होगा।
निजी बिजली वितरण पर उठाए सवाल
विकास उपाध्याय ने अन्य राज्यों में निजी बिजली वितरण कंपनियों के अनुभव का हवाला देते हुए दावा किया कि निजी कंपनियों के आने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। उन्होंने बिजली दरों, रखरखाव और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।
बिजली दर बढ़ने की जताई आशंका
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि भविष्य में सरकारी वितरण कंपनी कमजोर होती है और निजी कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ती है तो बिजली वितरण के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और दरों को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने व्हीलिंग चार्ज सहित अन्य शुल्कों के कारण भविष्य में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका जताई।
विकास उपाध्याय ने सरकार से टाटा पावर की याचिका क्रमांक 89/2026 को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निजी हाथों में सार्वजनिक बिजली व्यवस्था सौंपने की दिशा में आगे बढ़ती है तो कांग्रेस सड़क से लेकर विधानसभा तक आंदोलन करेगी।
याचिका अधिवक्ता शशांक मिश्रा, शुभेंद्रु प्रकाश राय और संतोष कुमार के माध्यम से लगाए जाने की जानकारी दी गई है।




