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झाखरपारा पंचायत में 15वें वित्त से करीब 5.43 लाख रुपये के निर्माण कार्यों पर सवाल, गुणवत्ता और अधूरे कार्यों की जांच की मांग

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देवभोग : ग्राम पंचायत झाखरपारा में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए जा रहे विभिन्न निर्माण कार्यों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने पंचायत क्षेत्र में कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, कार्य की प्रगति तथा स्वीकृत राशि के उपयोग को लेकर जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कई कार्यों में निर्माण की गुणवत्ता और कार्य पूर्णता की स्थिति मौके पर स्पष्ट रूप से जांचे जाने की आवश्यकता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घासीराम के खेत के सामने करीब 1 लाख 75 हजार 557 रुपये की लागत से पुलिया निर्माण कराया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही दिनों बाद पुलिया में दरारें दिखाई देने लगीं। इससे निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और तकनीकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मौके पर तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

इसी तरह विनोद के घर के पास नाली निर्माण के नाम पर 1 लाख 50 हजार रुपये की राशि आहरित किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर अभी लगभग 10 से 15 प्रतिशत ही कार्य हुआ है, जबकि राशि आहरण के करीब आठ माह बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। ऐसे में स्वीकृत राशि के विरुद्ध वास्तविक कार्य की स्थिति और भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग उठ रही है।

वहीं प्राथमिक शाला के पास जून माह में करीब 59 हजार 700 रुपये की लागत से प्रस्तावित कार्य को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। राशि स्वीकृत अथवा आहरित होने के बावजूद करीब दो माह बाद तक मौके पर कार्य शुरू नहीं किया गया था। इस मामले में भी स्वीकृति, भुगतान और वास्तविक कार्य की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।

इसके अलावा टाडीपारा में करीब 1 लाख 57 हजार 750 रुपये की लागत से निर्मित पुलिया की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ है या नहीं, इसकी तकनीकी जांच आवश्यक है।

लगातार सामने आ रही इन शिकायतों के बाद ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से पूरे मामले की स्थल जांच और तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि से होने वाले विकास कार्यों का उद्देश्य गांव में स्थायी और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि किसी निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों के विपरीत काम हुआ है या कार्य अधूरा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।

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