‘संकल्प फिफ्टीन’ में बच्चों ने जाना शासन का कामकाज, करियर से लेकर स्वरोजगार और सुरक्षा तक पर हुआ खुला संवाद
कोरिया : आकांक्षी विकासखंड बैकुण्ठपुर मुख्यालय अंतर्गत सोनहत के बच्चों के लिए आज का दिन सीखने, सवाल पूछने और अपने सपनों को नई दिशा देने का अवसर बना।
कोरिया कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव की पहल पर संचालित ‘कलेक्टर्स फिफ्टीन’ के अंतर्गत ‘संकल्प फिफ्टीन’ कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर बंगले में किया गया। कार्यक्रम की खासियत यह रही कि बच्चों को केवल जानकारी देने के बजाय उन्हें अधिकारियों से सीधे संवाद करने, अपने सवाल रखने और विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला।
सेवा संकल्प अभियान से जुड़े इस आयोजन में सोनहत के एकलव्य छात्रावास, स्वामी आत्मानंद विद्यालय तथा सोनहत स्कूल के बच्चों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में बच्चों ने शासकीय व्यवस्था, पुलिसिंग, डिजिटल सुरक्षा, करियर, स्वरोजगार, खेल और स्थानीय विरासत जैसे विषयों पर संवाद किया।
कार्यालयों का भ्रमण कर बच्चों ने पहले देखा, फिर पूछे सवाल
कलेक्टर बंगले में संवाद से पहले बच्चों को सोनहत के विभिन्न शासकीय कार्यालयों का भ्रमण कराया गया। बच्चों ने तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, थाना और बैंक जाकर वहाँ होने वाले कार्यों को समझा।
उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जाना कि नागरिकों की समस्याएँ किस प्रकार संबंधित कार्यालय तक पहुँचती हैं और शासकीय सेवाओं का लाभ लोगों तक किस प्रक्रिया से पहुँचता है। इस दौरान बच्चों ने अपनी जिज्ञासाएँ भी सामने रखीं। कार्यालयों में मिले अनुभवों और सवालों को लेकर बच्चे बाद में कलेक्टर बंगले पहुँचे, जहाँ अधिकारियों के साथ खुला संवाद हुआ।
कलेक्टर ने बच्चों की बात सुनी, सवालों पर हुई खुली बातचीत
कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने बच्चों के साथ सहज वातावरण में संवाद किया। उन्होंने बच्चों से उनकी रुचि, पढ़ाई, सपनों, करियर और भविष्य की योजनाओं के बारे में जाना तथा बच्चों को अपनी बात खुलकर रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
बच्चों ने भी अपनी जिज्ञासाएँ और सवाल सीधे कलेक्टर के सामने रखे। बातचीत के दौरान बच्चों को यह समझने का अवसर मिला कि किसी अधिकारी की भूमिका क्या होती है, प्रशासन किस प्रकार काम करता है और आम नागरिकों से जुड़ी समस्याओं के समाधान में विभिन्न विभागों की क्या भूमिका रहती है।
संवाद का केंद्र केवल बच्चों को समझाना नहीं, बल्कि उनकी बात सुनना और उनके सवालों को समझना रहा। इससे बच्चों को प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से जानने और अपने भविष्य को लेकर सोचने का अवसर मिला।
पुलिस से डर नहीं, संवाद और सहयोग जरूरी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पुलिस अधीक्षक श्री हरिश राठौर ने बच्चों से सड़क सुरक्षा, साइबर अपराध और डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग पर बातचीत की।
उन्होंने बच्चों को सुरक्षित यातायात व्यवहार, साइबर अपराधों से बचाव तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की जानकारी दी। कम्युनिटी पुलिसिंग के संदर्भ में उन्होंने बच्चों से सहज संवाद करते हुए पुलिस को सुरक्षा और सहायता से जुड़ी संस्था के रूप में समझने की बात कही।
करियर पर संवाद-‘अपने सपनों को पहचानो और दिशा तय करो’
कार्यक्रम में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं जिला शिक्षा अधिकारी ने बच्चों से करियर को लेकर बातचीत की। बच्चों की रुचि और क्षमता के अनुरूप विभिन्न करियर विकल्पों, प्रतियोगी परीक्षाओं और तैयारी की दिशा पर चर्चा हुई।
बच्चों को अपनी रुचि और प्रतिभा पहचानकर भविष्य के बारे में सोचने तथा लक्ष्य के अनुरूप तैयारी करने के लिए प्रेरित किया गया। संवाद का उद्देश्य बच्चों के सामने संभावनाओं की जानकारी रखने के साथ उन्हें अपने सपनों के बारे में सोचने और सवाल पूछने का अवसर देना रहा।
‘दीदी’ की कहानी से बच्चों ने समझी स्वरोजगार की राह
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की आजीविका गतिविधियों से जुड़ी ‘कोरिया मिलेट्स कैफे’ की हिना खान ने बच्चों के साथ अपनी यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद किस तरह उन्होंने आजीविका गतिविधि शुरू की और आगे बढ़ते हुए लगभग 25 से 30 दीदियों को रोजगार एवं आजीविका से जोड़कर काम कर रही हैं। बच्चों के लिए यह संवाद स्वरोजगार, समूह की भूमिका और अपने स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करने का एक प्रत्यक्ष उदाहरण बना।
कोरिया की विरासत से जुड़ाव-बच्चों ने किया पैलेस का भ्रमण
‘संकल्प फिफ्टीन’ में स्थानीय इतिहास और पर्यटन को भी सीखने का हिस्सा बनाया गया। बच्चों को कोरिया के ऐतिहासिक पैलेस का भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्होंने जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा और अपने क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं के बारे में जाना।
खेलों ने बढ़ाई सहजता, बच्चों के बीच बना संवाद
कलेक्टर बंगले में बच्चों के साथ बैडमिंटन, कैरम और ब्लॉक्स जैसी खेल गतिविधियाँ आयोजित की गईं। आइस -ब्रेकिंग गेम्स के माध्यम से बच्चों को सहज वातावरण मिला। अलग-अलग विद्यालयों और छात्रावासों से आए बच्चों ने साथ मिलकर खेलों में भाग लिया। इससे उनके बीच परिचय और संवाद बढ़ा तथा कार्यक्रम का माहौल औपचारिकता से अलग सहज और सहभागितापूर्ण बना।
‘संकल्प फिफ्टीन’ -बच्चों को देखने, पूछने और अपने सपनों पर बात करने का अवसर
‘संकल्प फिफ्टीन’ का केंद्र बच्चों के साथ संवाद रहा। एक ही दिन में बच्चों ने शासकीय कार्यालयों की कार्यप्रणाली देखी, अधिकारियों से सवाल पूछे, पुलिसिंग और डिजिटल सुरक्षा को समझा, करियर पर चर्चा की, स्वरोजगार की कहानी सुनी, स्थानीय विरासत देखी और खेल गतिविधियों में हिस्सा लिया।
यह पहल बच्चों को यह समझने का अवसर देती है कि शासन केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि उसका संबंध उनके परिवार, गाँव, शिक्षा, सुरक्षा, आजीविका और भविष्य से भी है।
‘संकल्प फिफ्टीन’ की सबसे खास तस्वीर शायद यही रही कलेक्टर के सामने बैठे बच्चे, उनके मन में उठते सवाल और उन सवालों को सुनने के लिए तैयार प्रशासन। संवाद की इसी प्रक्रिया से बच्चों को अपने सपनों को पहचानने, संभावनाओं को समझने और आगे की राह के बारे में सोचने का अवसर मिला।




