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‘क्या ड्रोन फोर्स बनाएगा भारत?’ वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने दिया जवाब, जानें पाकिस्तान के 5th जेनरेशन जेट पर क्या बोले

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नई दिल्ली :  भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में हुए कॉकपिट हमले के दौरान कैप्टन स्मित मच्छर की भूमिका की सराहना की है। 3 अक्टूबर को दिल्ली में 94वें वायुसेना दिवस के अवसर पर आयोजित अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में एपी सिंह ने कहा कि कैप्टन स्मित ने बेहद कठिन परिस्थिति में असाधारण शारीरिक और मानसिक दृढ़ता दिखाई।

उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित ने जो किया, वह असाधारण रूप से बहादुरी भरा था और यह एविएशन कम्युनिटी के लिए एक सबक है। फ्लाईदुबई की इस घटना में सह-पायलट द्वारा कैप्टन स्मित पर कथित हमला किए जाने के बाद विमान गंभीर संकट में आ गया था। घायल होने के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।

अलग ड्रोन फोर्स बनाने की जरूरत नहीं

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना में अलग ड्रोन फोर्स बनाए जाने की संभावना को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि ड्रोन वायुसेना के लिए ‘क्रांतिकारी’ नहीं बल्कि ‘विकासवादी’ क्षमता हैं। वायुसेना ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन की संख्या, प्रकार और क्षमताओं को बढ़ा रही है, लेकिन इन्हें मौजूदा हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत करके इस्तेमाल करना ज्यादा प्रभावी होगा।

एयर चीफ ने कहा कि अलग-अलग हथियार प्रणालियों को अलग-अलग तरीके से संचालित करने के बजाय युद्ध के मैदान में उनके बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उनके मुताबिक, वायुसेना में ऐसी क्षमताओं को संभालने वाली विशेष इकाइयां पहले से मौजूद हैं और आवश्यकता के अनुसार उनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र, पाकिस्तान की एयर पावर पर भी बोले

एपी सिंह ने पाकिस्तान की ओर से चीन से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान लेने और अपने पायलटों को प्रशिक्षण देने के प्रयासों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है, लेकिन इसे लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए हथियारों और विभिन्न प्रणालियों के इंटीग्रेशन को महत्वपूर्ण बताया।

AMCA में देरी हुई तो दूसरे विकल्पों पर विचार

वायुसेना प्रमुख ने भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए। उन्होंने कहा कि यदि AMCA कार्यक्रम में देरी होती है तो वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए दूसरे प्लेटफॉर्म पर विचार करना पड़ सकता है।

एपी सिंह के मुताबिक, रूस की ओर से Su-57 की पेशकश की गई है, लेकिन इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वायुसेना को अपनी मौजूदा फाइटर स्क्वाड्रन क्षमता को मजबूत करने के लिए हर साल बड़ी संख्या में नए लड़ाकू विमानों की जरूरत है।

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