अमन पथ न्यूज़ बालोद से उत्तम साहू : छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर हुई बंपर धान खरीदी के बाद अब समितियों का संकट सामने आ रहा है। प्रदेश की 2058 प्राथमिक कृषि साख समितियों को धान खरीदी का कमीशन आज तक नहीं मिला है।
जानकारी के अनुसार मार्कफेड द्वारा समितियों को प्रति क्विंटल के हिसाब से जो कमीशन दिया जाता है, उसका भुगतान 10 महीने बीतने के बाद भी लंबित है।
कमीशन नहीं मिलने से समितियों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। कई समितियों में कार्यरत प्रबंधक, ऑपरेटर और दैनिक मजदूरों को पिछले कई महीनों से वेतन तक नहीं मिल पाया है।
कर्मचारियों में आक्रोश
सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ का कहना है कि पिछले दो साल से धान का निराकरण समय पर नहीं हुआ, जिससे सूखत आना स्वाभाविक है, लेकिन सरकार सूखत का प्रावधान खत्म कर उल्टा कर्मचारियों से वसूली और ऊपर से कमीशन भी नहीं दे रही।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने भी इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और कहा था कि कमीशन नहीं मिलने से समिति कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं।बालोद जिले के कुछ समिति कर्मचारियों ने वेतन देने श्रम विभाग में आवेदन किया है जिसकी सुनवाई कुछ दिनों में होगी देखना होगा श्रम विभाग इस पर क्या निर्णय लेता है। बता दे सेवा सहकारी समितियों का मुख्य व्यवसाय धान खरीदी है और धान खरीदी में जो कमीशन मिलता है उसी के भरोसे उन्हें वेतन सहित समिति के अन्य खर्चे चलते हैं लेकिन सुखत की मार के चलते समितियों को जो लगातार नुकसान हो रहा है उसकी वजह से समिति कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहे हैं। और समितियो की स्थिति बदतर होते जा रही है। समिति कर्मचारियों का कहना है सरकार कम से कम धान खरीदी पर 1% सुखात दें ताकि समितियों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो।
प्रदेश के समिति कर्मचारियों ने शासन से मांग की है कि 2025-26 का पूरा कमीशन, सूखत राशि और वेतन का भुगतान तत्काल किया जाए, नहीं तो आने वाले खरीफ सीजन 2026-27 की तैयारी भी प्रभावित होगी।




