राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :– आस्था, संस्कृति, परंपरा और पारिवारिक एकता का अनूठा संगम… गरियाबंद में गुजराती समाज द्वारा आयोजित गरबा महोत्सव केवल नृत्य का आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। करीब 59 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह गरबा उत्सव पीढ़ियों को जोड़ने और सामाजिक सद्भाव की मिसाल पेश करने का काम कर रहा है। इस वर्ष आयोजन के पारंपरिक स्थल बस स्टैंड स्थित राजूबिड़ी प्रांगण के बजाय मजरकट्टा स्थित निषाद समाज परिसर में किया जा रहा है, जहां गरबा खेलने और इस सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
गरियाबंद के इस ऐतिहासिक गरबा महोत्सव की सबसे खास बात इसका पारिवारिक माहौल है। यहां छोटे बच्चों से लेकर युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और वरिष्ठ नागरिक तक पूरे उत्साह के साथ गरबा करते नजर आते हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागी जब गरबा की धुन पर एक साथ कदम मिलाते हैं, तो पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग जाता है। रंग-बिरंगे परिधान, संगीत की लय और सामूहिक नृत्य इस आयोजन को खास बनाते हैं।
इस गरबा की पहचान केवल गुजरात की लोकसंस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरियाबंद के सामाजिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्षों से इस आयोजन से जुड़ी पीढ़ियों के लिए गरबा उत्सव आपसी मेल-मिलाप, पारिवारिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर बन गया है। यही वजह है कि हर वर्ष शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंचते हैं और उत्सव में शामिल होकर अपनी परंपरा से जुड़ाव महसूस करते हैं।
लगभग छह दशकों की इस यात्रा में गरियाबंद का गरबा महोत्सव समय के साथ एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। इसकी निरंतरता बताती है कि संस्कृति केवल आयोजनों से नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी और नई पीढ़ी तक परंपराओं को पहुंचाने से जीवित रहती है। बच्चों को पारंपरिक गरबा से जोड़ना और बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी को एक मंच पर लाना इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है।
गुजराती समाज की इस सांस्कृतिक पहल ने गरियाबंद में ऐसा वातावरण तैयार किया है, जहां गरबा मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक एकता और पारिवारिक सौहार्द का प्रतीक बन गया है। मजरकट्टा स्थित नए आयोजन स्थल पर भी इसी उत्साह और परंपरा की झलक देखने को मिल रही है।
आशीष ठक्कर और प्रकाश सरवैया ने बताया इस आयोजन के इतिहास, इसकी शुरुआत, पुराने आयोजन स्थलों और समय के साथ आए बदलावों को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगी। उनके अनुभवों के माध्यम से यह भी सामने आ सकता है कि छह दशकों के करीब की इस परंपरा ने गरियाबंद की सांस्कृतिक पहचान को किस तरह मजबूत किया है।
गरियाबंद का यह ऐतिहासिक गरबा महोत्सव संदेश देता है कि परंपराएं तभी जीवंत रहती हैं, जब पूरा समाज उन्हें अपनी विरासत मानकर आगे बढ़ाता है। करीब 59 वर्षों से चली आ रही यह सांस्कृतिक यात्रा आज भी गरियाबंद को एक परिवार की तरह जोड़ने का काम कर रही है।




