पटवारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच भूमि पूजन कार्यक्रम में पटवारी की मौजूदगी, कार्यशैली पर उठे सवाल!
एक तरफ जनता राजस्व कार्यों के लिए परेशान, दूसरी तरफ विकास कार्यों के भूमि पूजन में उपस्थिति—आखिर प्राथमिकता क्या है?
राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :- पटवारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर जिला पटवारी संघ गांधी मैदान गरियाबंद में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। इस आंदोलन के चलते राजस्व संबंधी कार्यों के लिए आम नागरिकों और किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच नगर पालिका परिषद गरियाबंद द्वारा आयोजित विकास कार्यों के भूमि पूजन कार्यक्रम में पटवारी लोकेश साहू की मौजूदगी ने एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
कार्यक्रम की तस्वीर में पटवारी लोकेश साहू की मौजूदगी सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब पटवारी संघ अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत है और आम जनता अपने जरूरी राजस्व कार्यों के लिए भटक रही है, तब संबंधित पटवारी की सार्वजनिक कार्यक्रमों में भागीदारी को किस नजरिए से देखा जाए?
सवाल यह नहीं कि भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होना गलत है या सही, बल्कि सवाल यह है कि जब जनता के काम प्रभावित हो रहे हों, तब जनता के प्रति जवाबदेही और प्राथमिकताओं पर चर्चा क्यों न हो?
जनता के काम ठप, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रमों में उपस्थिति पर चर्चा!
किसानों को जमीन संबंधी दस्तावेजों, नामांतरण, सीमांकन और अन्य राजस्व कार्यों की आवश्यकता होती है। ऐसे कार्यों में देरी का असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में पटवारी संघ के आंदोलन के बीच किसी पटवारी की सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूदगी स्वाभाविक रूप से जवाबदेही का प्रश्न खड़ा करती है।
जनता दफ्तरों के चक्कर काटे, साहब कार्यक्रमों में नजर आएं!
विडंबना देखिए कि आम नागरिक अपने जरूरी कामों के लिए परेशान हों, किसान राजस्व संबंधी समस्याओं के समाधान की बाट जोहें और दूसरी तरफ सार्वजनिक आयोजनों में अधिकारियों-कर्मचारियों की मौजूदगी चर्चा का विषय बने!
आखिर जनता को राहत कब मिलेगी? आंदोलन की मांगों के बीच आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान कौन करेगा? और क्या पटवारी संघ जनता की परेशानी को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रहा है?
इन सवालों का जवाब पटवारी संघ और संबंधित विभाग से अपेक्षित है।
निष्कर्षतः, कर्मचारी संगठनों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन जनता की परेशानी और शासकीय सेवाओं की जवाबदेही का प्रश्न भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नगर पालिका के भूमि पूजन कार्यक्रम में पटवारी की मौजूदगी की तस्वीर ने इसी सवाल को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है—आखिर जनता के काम कब होंगे और उनकी परेशानी का जवाबदेह कौन होगा?




