सक्ती : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सारागांव में आयोजित दशहरा महोत्सव एवं मड़ाई मेले में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा-अर्चना के बाद रावण दहन किया गया। इस दौरान अतिथियों ने विजयादशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की अपील की।
भव्य शोभायात्रा के साथ कार्यक्रम स्थल पहुंचे अतिथि
दशहरा महोत्सव के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान जी को रथ में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में डॉ. चरणदास महंत भी भगवान श्रीराम के रथ के साथ पैदल चलते हुए कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। आयोजन समिति ने अतिथियों का पुष्पहार, पुष्प और अक्षत भेंटकर स्वागत एवं सम्मान किया। इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और परंपरानुसार रावण दहन का आयोजन हुआ।
‘विजयादशमी सत्य, धर्म और न्याय की शक्ति का प्रतीक’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि विजयादशमी केवल भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का पर्व नहीं है, बल्कि यह सत्य, धर्म, न्याय और सदाचार की शक्ति का प्रतीक भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों की अंततः विजय होती है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और जनकल्याण का अनुपम उदाहरण है। उनके आदर्श आज भी परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देते हैं। विजयादशमी का पर्व हमें अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, द्वेष और नकारात्मकता जैसी बुराइयों को त्यागकर सदाचार अपनाने का संकल्प लेने का संदेश देता है।
‘अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित’ : ज्योत्सना महंत
कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने विजयादशमी को अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि दशहरा पर्व पर रावण के पुतले का दहन इस बात का संदेश देता है कि कोई व्यक्ति कितना भी ज्ञानी या शक्तिशाली क्यों न हो, यदि वह अहंकार, अधर्म और दूसरों का अहित करने की प्रवृत्ति में डूब जाता है, तो उसका पतन निश्चित है।
उन्होंने रावण के चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि पौराणिक कथाओं में रावण को असाधारण ज्ञान और शक्तियों से संपन्न बताया गया है, लेकिन उसका अहंकार ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बना। रावण का जीवन यह सीख देता है कि केवल ज्ञान और शक्ति पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उनके साथ नैतिकता, विवेक और अच्छे कर्म भी आवश्यक हैं।
भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश
कार्यक्रम में सूरज महंत ने कहा कि दशहरा जैसे पर्व भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है और समाज में आपसी भाईचारे एवं सद्भाव को मजबूती मिलती है।
उन्होंने भगवान श्रीराम से सारागांव के नागरिकों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। साथ ही, भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलकर सशक्त, समृद्ध और संस्कारवान समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में नागरिक रहे मौजूद
दशहरा महोत्सव एवं मड़ाई मेले में जांजगीर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, धीरेंद्र बाजपेयी, नगर पंचायत अध्यक्ष छबिलाल सूर्यवंशी, नगर पंचायत उपाध्यक्ष दिलेश्वर राठौर, नगर सेना युवा अध्यक्ष अविनाश राठौर, दीपक राठौर, राजू राठौर, पूरन राठौर, निक्की, दुर्गेश, ओजस्वी, कृष्णा, नंदू, रविशंकर, आकाश राठौर, डॉ. अतुल राठौर, रामरतन राठौर, विधायक प्रतिनिधि गिरधर जायसवाल, पिंटू ठाकुर, सतीश शर्मा और राजू शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं आयोजन समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नगरवासी, महिलाएं और पुरुष शामिल हुए।




