संवाददाता अमनपथ राजूनाथ जोगी नगरी : सिहावा पूर्व विधायक डा लक्ष्मी ध्रुव ने 27 अक्टूबर को साय कैबिनेट की बैठक मे लिये गये धान खरीदी केन्द्र निर्णय को पूरी तरह किसान विरोधी व निराशा जनक बताया उन्होने कहा साय सरकार पिछले तीन वर्षो से किसानो को ठगने का काम कर रही है पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव ने आगे कहा की इन तीन सालो मे केन्द्र सरकार द्वारा धान की एम एस पी मे लगभग 380 रूपय की वृद्धि की गई इस वृद्धि को जोडकर इस वर्ष किसानो को कम से कम 3500 प्रति क्वीटल समर्थन मूल्य के दर से दिया जाना चाहीये था लेकिन साय सरकार ने इस वर्ष भी किसानो के साथ कुठाराघात करते हुए केवल 3100 सौ रूपय प्रति क्वीटल ही देने का निर्णय लिया यह छत्तीसगढ के अन्नदाताओ के साथ धोखा है सरकार 27 50 लाख किसानो से 15 नवंबर से 21 क्वीटल प्रति एकड से धान खरीदी की बात तो कर रही लेकिन दाम वही पुराना देकर वाहवाही लूटना चाह रही है.उन्होने कैबिनेट मे एग्रीस्टेक पंजीयन को अनिवार्य कर दिया है और कहा पिछले वर्ष किसानो का एग्रीस्टेक पंजीयन को नये पंजीयन की जरूरत नही होगी लेकिन हजारो किसान जिनका किसी कारणवश एग्रीस्टेक पंजीयन नही हो पाया उनके लिये सरकार ने कोई वैकल्पिक या औपचारिक व्यवस्था नही की है ऐसे किसान धान बेचने से वंचित हो जायेगे सरकार कह रही है ऋण पुस्तिका लाने की जरूरत नही होगी और डिजिटल क्राप सर्वे से रकबा का आनलाईन निर्धारण होगा लेकिन हकीकत यह है की सरकार भी जानती है डीपीएस सर्वे मे भारी विसंगतिया है खसरा और रकबा मे भारी गडबडी सामने आ रही पूर्व विधायक ध्रुव ने कहा की डीपीएस सर्वे मे विसंगती के कारण गांव गांव मे किसानो के बीच विवाद बन सकती है और त्रुटी सुधार कराते कराते धान खरीदी का भी समय निकल जायेगा अंत मे किसान अपनी उपज नही बेच पायेगे सरकार 360 नये केन्द्र खोलकर 3100 केन्द्रो पर खरीदी और बायोमैट्रिक सत्यापन की बात कर रही लेकिन जब किसान का रकबा ही गलत दर्ज होगा तो वह केन्द्र तक कैसे पहुंचेगा यह सरकार किसान हितैषी का ढोंग कर रही है जबकी असल मे यह निर्णय किसान को परेशान करने वाला निर्णय है।




