
रिपोर्टर मुन्ना पांडेय,लखनपुर सरगुजा : छत्तीसगढ़ प्रदेश में सता परिवर्तन होने के साथ सियासतदारों के चेहरे बदले लेकिन सरगुजा जिले के परियोजना कार्यालय में सालों से विराजमान बाबू तथा सेक्टर सुपरवाइजरो की तबादला नहीं हुई।सालों एक ही कार्यालय में विराजमान हैं।
ऐसा प्रतीत होता है परियोजना कार्यालय में कुंडली मारे बाबू सुपरवाइजरो के नाम शासन प्रशासन ने सेवा निवृत्त होने तक एक ही दफ्तर में रहने वसीयत लिख दिया हो। जनचर्चा है परियोजना कार्यालय में विराजमान बाबू का सियासी लोगों से सांठ-गांठ होने कारण अन्यत्र तबादला नहीं किया गया है।जबकि परियोजना कार्यालय से अबतक करीब 10-11 परियोजना अधिकारियों का तबादला अन्यत्र हो चुका है।
शासन प्रशासन कुंडली मारे बाबू सेक्टर सुपरवाइजरो पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। नियमानुसार लम्बे समय से बैठे बाबू का तबादला अन्यत्र होने चाहिए थी लेकिन एकीकृत परियोजना कार्यालय लखनपुर में अंतहीन बाबू राज्य कायम है। काबिले गौर है प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ सियासतदारों के चेहरे बदले लेकिन परियोजना कार्यालय से बाबू एवं सुपरवाइजरो का चेहरा अबतक नहीं बदला।
शासन के ओर से कर्मचारियों के लिए आफिस आने जाने का समय सीमा निर्धारित किया गया है बाद इसके परियोजना कार्यालय में पदस्थ बाबू तथा दूसरे कर्मचारी
वक्त -बे – वक्त दफ्तर में आते और मन मुताबिक चले जाते हैं।यह सिलसिला बरसों से बरकरार है। इनके उपर कोई प्रशासकीय बंदिश या दबाव का असर नहीं है।
किसी कार्यवश दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से कार्यालय में आने वाले आगन बाड़ी कार्यकर्ता सहायिका महिला समुह सदस्यों अथवा दूसरे जरूरतमंदो को अधिकारी बने बाबू के कार्यालय में आने का इतजार करना पड़ता है।
शासन व जिला प्रशासन का नियंत्रण नहीं होने से परियोजना कार्यालय में नियम कायदों का कोई मायने नहीं रह गया है। शासन द्वारा निर्धारित 11 बजे से 5 बजे तक कार्यालय में हाजिर रहने के सभी नियम बेकार साबित होने लगे हैं। दूसरे स्थान से आना-जाना करते हुये वेतन लाभ ले रहे हैं।
कार्यकर्ता सहायिका नियुक्ति में गड़बड़ी किये जाने जैसी गंभीर शिकायतो के बाद भी बाबू का तबादला नहीं हुआ। जिससे कार्यलय में पदस्थ बाबू का हौसला और भी बुलंद हैं। परियोजना कार्यालय के अलावा भी कुछ विभागो में लम्बे समय से अंतहीन बाबूराज बरकरार है। क्षेत्र वासियों का मानना है एक ही दफ्तर में कुंडली मारे बाबूओं का तबादला होनी चाहिए था। नहीं हुआ है। उन विभागों में सर्जरी निहायत जरूरी है।
ताकि लम्बे समय से एक ही दफ्तर में बैठे इन बाबूओं की मनमर्जी खत्म होने के साथ कार्यालयीन अव्यवस्थाओं में सुधार हो।



