
रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा लखनपुर : आदि काल से हिन्दू धार्मिक पर्वों में बसंत पंचमी का विशेष महत्व रहा है। मां सरस्वती के जन्मोत्सव को बसंत पंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। बसंत पंचमी मनाये जाने के पीछे बहुत सारी धार्मिक मान्यताऐ जुड़ी हुई है।
फिलहाल नगर लखनपुर सहित आसपास ग्रामीण इलाकों में बसंत पंचमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। स्कूल विद्यालयो के अलावा आफिसों संगीत साहित्य साधना करने वाले साधक तथा श्रद्धालुओं के अलावा भक्तों ने नीजी घरों में मां सरस्वती की प्रतिमा रख वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा आराधना किये। खास कर शैक्षणिक संस्थानों में छात्र छात्राओं द्वारा विद्या के देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की गई। साथ ही बसंतोत्सव पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। कन्या/ बालक हायर सेकेण्डरी शासकीय प्रायमरी स्कूल के अतिरिक्त एचिव्हर, नेहरू बाल मंदिर, सरस्वती शिशु मंदिर,नीजी विद्यालयों में सरस्वती पूजा धूमधाम से मनाई गई ।
पौराणिक मान्यता अनुसार बसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाता है। हंस पर विराजमान माता सरस्वती जनमानस के जीवन में छाये अज्ञानता को मिटाकर ज्ञान और बुद्धि का उपहार देकर मनुष्य जाति का कल्याण करती है। भगवती को बीणावादनी, विद्याधात्री सरस्वती वाग्देवी अन्य नामों से जाना जाता है। छात्र छात्राओं तथा श्रद्धालुओं ने मा सरस्वती के प्रतिमा स्थापित कर उनके चरणों में पुस्तक कापी क़लम वस्त्र मिष्ठान आदि रख आराधना किये। तत्पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।
मां सरस्वती के जन्मोत्सव के साथ ही ऋतुराज बसत के आगमन का स्वागत करते हुए धार्मिक गीत संगीत के साथ उल्लास के साथ उत्सव मनाया गया। हिन्दू धर्म के अनुसार मां सरस्वती के जन्मोत्सव को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। क्षेत्र में बसंत पंचमी दो दिन अर्थात रविवार एवं सोमवार को हर्षोल्लास मनाया गया।



