
किरंदुल:- नगर पालिका आम निर्वाचन में 26 जनवरी को भाजपा ने पार्टी के प्रत्याशियों की घोषणा किया जिसमें दंतेवाड़ा के कई निकाय में टिकट वितरण को देखते हुवे कार्यकर्ताओं में दबी जुबान में नाराजगी साफ जाहिर किया है
वहीं किरंदुल नगर पालिका में जहां भाजपा में रहते हुवे शैलेंद्र सिंह ने वर्ष 2010 में भाजपा के विरुद्ध चुनाव लगा और पार्टी को कमजोर किया वही 2015 में पुनः अपनी धर्म पत्नी को भाजपा के विरुद्ध चुनाव लगाया उसका वर्तमान कार्यकाल खराब होने के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा पुनः 2019 में जहां जहां भाजपा के पार्षदों के कद्दावर नेता की जीत तय थी वहां अपना पैनल बनाकर भाजपा को हराने में प्रमुख भूमिका निभाई पुनः उनकी पत्नी की जमानत जप्त हुई किसी पार्टी में सहारा नहीं मिलने के बाद वह भाजपा को सत्ता में वापस आता देख पार्टी में शामिल हुआ और मात्र एक वर्ष का ही कार्यकर्ता होने के बावजूद पार्टी ने उनकी घरेलू पत्नी जोकि आजतक कभी पार्टी में नहीं आई है उन्हें टिकट देकर कांग्रेस पार्टी के रास्ते में चलते नजर आये
जहां पार्टी में वरिष्ठ और अनुभवी व्यक्ति पार्टी के लिए अपना जीवन समर्पण कर दिए उनमें से किसी को टिकट न देकर बार बार भाजपा को हराने वाले को टिकट देकर पार्टी की महिलाओं का मनोबल तोड़ दिया जनता में इस बात को लेकर कही आक्रोश है साथ ही पार्षद टिकट को लेकर भी काफी रोष है
परिवारवाद की विरोधी पार्टी आज आज पति पत्नी को टिकट देकर अपने विचारों से भटक गई है
इस कारण पार्टी के महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ने मीरा तिवारी ने पार्टी से त्याग पत्र देकर चुनाव लड़ा तो 6 दिन बाद पार्टी से निष्कासन का पत्र जारी का उनका मनोबल तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
किरंदुल की जनता साक्षर और समझदार है वो जानती है कि अध्यक्ष पद के लिए अनारक्षित महिला पद में राजनीतिक अनुभव के आधार पर वोट करना नहीं किसी के पति के द्वारा किए गए कार्य के आधार पर मगर इस बार जनता समझदार हो चुकी है.
वहीं नगर की जनता को मीरा तिवारी के राजनीतिक अनुभव और पार्टी द्वारा उनके साथ किए अन्याय के कारण पूरा समर्थन मिल रहा है.



