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मोदी और ट्रंप की मुलाकात में किसका चला सिक्का, क्या बोला वर्ल्ड मीडिया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा पर दुनिया भर की नजर है। पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात की है। ट्रंप की टैरिफ लगाने की धमकी के बाद पहली बार दोनों देशों के नेता मिल रहे थे। हालांकि इस बातचीत में ट्रंप और मोदी ने इससे निपटने के उपायों को लेकर बातचीत की। खुद डील करने के माहिर माने जाने वाले ट्रंप ने पीएम मोदी को अपने से बड़ा निगोशिएटर बता डाला। वहीं, पीएम मोदी ने ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन स्लोगन की तर्ज पर मेक इंडिया ग्रेट अगेन की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा है कि अमेरिका भारत के साथ सैन्य रिश्ते को मजबूती देना चाहता है। अमेरिका द्वारा भारत को एफ-35 फाइटर जेट बेचने को इसकी अहम कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा इस कदम को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने की कोशिश भी माना जा रहा है। वहीं पीएम मोदी द्वारा गैरकानूनी ढंग से अमेरिका में रह रहे भारतीयों को वापस लिए जाने की बात को रॉयटर्स ने प्रमुखता दी है। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग के नेटवर्क को धराशायी करने की बात कही है। वहीं, दोनों नेताओं ने अल्पसंख्यकों के अधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत नहीं की।

बीबीसी ने बैठक को प्रतीकात्मक बताया, जिसमें व्यापार विवादों पर बहुत कम ठोस प्रगति हुई। हालांकि, इसने स्वीकार किया कि दोनों नेताओं ने रणनीतिक संबंधों और साझा भू-राजनीतिक हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए इस अवसर का उपयोग किया। अल जज़ीरा ने मानवाधिकार चिंताओं पर बात की। उसने दोनों नेताओं की लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस स्वतंत्रता पर चर्चा से बचने के लिए आलोचना की।

समाचार एजेंसी एएफपी ने व्यापक जियो-पॉलिटिकल संदर्भ पर जोर दिया। उसने बताया कि यह बैठक क्षेत्र में चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए एक बड़े अमेरिकी रणनीति का हिस्सा थी। एजेंसी ने यह भी बताया कि मजबूत बयानबाजी के बावजूद, व्यापारिक तनावों को हल करने में तत्काल कोई प्रगति नहीं हुई। एबीसी न्यूज ने दोनों देशों में घरेलू प्रतिक्रियाओं पर बात की। उसने रिपोर्ट में बताया कि बैठक को एक कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा गया, लेकिन भारत और अमेरिका में विपक्ष के नेताओं ने ठोस समझौतों की कमी की आलोचना की।

सीएनएन के मुताबिक ट्रम्प के टैरिफ विकासशील देशों को विशेष रूप से कठिन प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर भारत, ब्राजील, वियतनाम और अन्य दक्षिण पूर्व एशियाई और अफ्रीकी देशों के मामले में। यह देखते हुए कि उनके देशों में लाए गए अमेरिकी सामानों पर टैरिफ दरों में कुछ व्यापक अंतर हैं।

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