हिंदू धर्म के अनुसार, हर महीने में दो पक्ष होते हैं एक कृष्ण तो दूसरा शुक्ल पक्ष. दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है. प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन व्रत रखकर संध्या काल यानी गोधूलि बेला में भगवान भोलेनाथ की पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए. माना जाता है कि इससे भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. वहीं, फाल्गुन मास का प्रदोष व्रत बेहद खास होने जा रहा है.
इस साल महाशिवरात्रि के ठीक 1 दिन पहले प्रदोष व्रत रखा जाएगा यानी फाल्गुन मास का पहला प्रदोष व्रत 25 फरवरी को रखा जाएगा. प्रदोष व्रत के दिन महादेव और माता पार्वती की पूजा का विधान है. प्रदोष व्रत रखने से जीवन के सभी संकट और दुख दूर हो जाते हैं. वहीं, इस बार प्रदोष व्रत करने वाले हैं तो ध्यान रहे दूसरे महाशिवरात्रि का व्रत भी है.
कब से शुरु हो रही त्रयोदशी तिथि
ज्योतिषाचार्य ने बताया ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 25 फरवरी दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से हो रही है. समापन अगले दिन यानी 26 फरवरी सुबह 11 बजकर 43 मिनट पर होगा. क्योंकि, त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है, इसलिए 25 फरवरी को ही प्रदोष का व्रत रखा जाएगा.
बन रहे बेहद शुभ योग
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस साल फाल्गुन मास की त्रयोदशी तिथि के दिन बेहद शुभ योग बन रहे हैं. इस दिन त्रिपुष्कर योग और वरियान योग जैसे दुर्लभ संयोग का निर्माण हो रहा है. साथ ही इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र भी रहेगा. इस मौके पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने पर सभी संकटों से मुक्ति पाई जा सकती है.
क्या करें प्रदोष व्रत पर
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि 25 फरवरी को प्रदोष व्रत रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव की विशेष पूजा करें. उस दिन अगर साधक षोडशोपचार विधि से पूजा कर दूध से भोलेनाथ पर अभिषेक करे तो महादेव की कृपा बरसेगी.



