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पानी की बूंद-बूंद को क्यों तरस रहा पाकिस्तान? 700 फीट खोदने पर भी मिल रही मिट्टी

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नई दिल्ली :  पाकिस्तान एक बार फिर मुसीबतों से घिरा है। पहले से ही कर्ज, महंगाई और भूखमरी से जुझ रहे पड़ोसी मुल्क की हालत अब और भी खस्ता हो गई है। दरअसल पाकिस्तानी मौसम विभाग ने फरवरी और मार्च में कम बारिश की संभावना जताई है और कहा है कि इस दौरान सूखा भी झेलना पड़ेगा।इस चेतावनी के बाद रावलपिंडी शहर की जल और स्वच्छता एजेंसी (वासा) ने शहर के बाशिंदों की पानी की जरूरतों को लेकर एहतियाती चेतावनी जारी किया है और शहर को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है।

जनसंख्या और कम बारिश बनी ‘आफत’ की वजह

पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, वासा के प्रबंध निदेशक मुहम्मद सलीम अशरफ ने कहा कि रावलपिंडी के गैरिसन शहर में रहने वाले लोगों के लिए पानी की कमी सूखे की वजह से हुई है। इसके अलावा जनसंख्या की तेज वृद्धि, कई आर्थिक गतिविधियों और संसाधनों की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

अशरफ ने डॉन के हवाले से कहा, “वासा रावलपिंडी पानी की आपूर्ति में गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहा है और इस स्थिति को देखते हुए, रावलपिंडी में सूखा आपातकाल लगाने का फैसला लिया गया है ताकि लोग पानी का संजीदगी से इस्तेमाल करें।”

700 फीट पर भी नहीं मिल रहा पानी

वासा के प्रबंध निदेशक ने कहा कि लंबे वक्त से बारिश की कमी के कारण बांधों और अंडरग्राउंड वॉटर सोर्स में तेजी से गिरावट आई है, इससे लोगों को पानी का किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

रावलपिंडी शहर को हर रोज 6.8 करोड़ गैलन (एमजीडी) पानी की दरकार होती है, जबकि 51 एमजीडी मौजूदा संसाधनों के जरिए मुहैया किया जा रहा है, जिसमें रावल और खानपुर बांध और 490 से अधिक ट्यूबवेल शामिल हैं।

वासा अधिकारियों के अनुसार, ग्राउंड वॉटर तेजी से खत्म हो रहा था। पानी का स्तर 1990 के दशक में 100 फीट था, लेकिन तब से यह 700 फीट तक गिर गया है।

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