
दंतेवाडा : दंतेवाडा में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय अंतर्विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी के दिशानिर्देशों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का उद्देश्य एनीमिया मुक्त भारत अभियान के सुचारू रूप से क्रियान्वयन के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।
कार्यशाला में शिक्षा विभाग, महिला बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। विशेष रूप से, स्वास्थ्य विभाग से सभी BMO, BPM, BETO और BDM ने कार्यशाला में भाग लिया, जबकि महिला बाल विकास विभाग से सभी परियोजना अधिकारी और शिक्षा विभाग से सभी खण्ड शिक्षा अधिकारी भी उपस्थित थे। इस कार्यशाला में तीनों विभागों के बीच सामूहिक प्रयासों से एनीमिया को समाप्त करने के उपायों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला का संचालन एनीमिया मुक्त भारत के तकनीकी सहायक न्यूट्रीशन इंटरनेशनल के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर श्री रत्नेश श्रीवास्तव और संभाग समन्वयक श्री प्रवीण कुमार साहू ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली और अंतर्विभागीय समन्वय के महत्व पर विस्तृत रूप से जानकारी दी। इस अवसर पर एनीमिया की समस्या को समाप्त करने के लिए विभागों द्वारा उठाए गए कदमों पर भी चर्चा की गई और विभिन्न विभागों के अधिकारी एकजुट होकर इस अभियान में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किए गए।
कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों ने एनीमिया की स्थिति और इसके प्रभाव को समझते हुए स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा से जुड़ी विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श किया। साथ ही, समन्वित प्रयासों से इस गंभीर समस्या को नियंत्रित करने के उपायों पर कार्य करने की बात कही गई। इसके अलावा, कार्यशाला के अंतर्गत अधिकारियों को एनीमिया की पहचान, निवारण और उपचार के बारे में प्रशिक्षण भी दिया गया।
इस कार्यशाला से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि एनीमिया को समाप्त करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद आवश्यक है। सभी विभागों के एकजुट प्रयासों से ही इस अभियान को सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है, ताकि देश को एनीमिया मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकें।
कार्यशाला के समापन पर सभी अधिकारियों ने इस अभियान में अपने-अपने विभागों की ओर से अधिक सक्रिय योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि एनीमिया को खत्म करने में दांतेवाड़ा जिला एक आदर्श बन सके।



