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पहलगाम अटैक का सच छुपा रहा ज‍िपलाइन ऑपरेटर? NIA की जांच में क्‍या हुआ नया खुलासा…

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29 अप्रैल 2025:- जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की तह तक जाने के ल‍िए नेशनल इन्‍वेस्‍ट‍िगेशन एजेंसी (NIA) हर उस शख्‍स से पूछताछ कर रही है, जिसका कोई न कोई कनेक्‍शन है. एनआईए ने उस जिपलाइन ऑपरेटर मुजम्मिल को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है, जिसका वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो में वह बार-बार ‘अल्‍लाह हू अकबर, अल्‍लाह हू अकबर’ कहता नजर आ रहा था. जबक‍ि उसे पता था क‍ि आतंकी आ चुके हैं, गोल‍ियां चला रहे हैं, इसके बाजवूद वह टूर‍िस्‍टों को सचेत नहीं करता है. सूत्रों के मुताबिक, एनआईए की पूछताछ में उसकी बातों में विरोधाभास नजर आ रहा है. जो कुछ भी वह बता रहा है, वह वीडियो से मैच नहीं कर रहा है. एनआईए ने उसके फोन डिटेल्‍स भी चेक क‍िए हैं. इससे उसकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

क्‍या-क्‍या दावे कर रहा
यह वीडियो और भट्ट का बयान NIA की जांच का आधार बना. NIA सूत्रों के अनुसार, जिपलाइन ऑपरेटर मुज़म्मिल के बयानों में कई विरोधाभास पाए गए हैं. उसने दावा किया कि वह हमले के दौरान सामान्य रूप से काम कर रहा था और उसे आतंकी गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी. हालांकि, वायरल वीडियो में उसका व्यवहार और नारेबाजी उसके इस दावे से मेल नहीं खाती. सूत्रों ने बताया कि ऑपरेटर हमले के तुरंत बाद सीधे अपने घर चला गया, जो सामान्य परिस्थितियों में संदिग्ध माना जा रहा है.

शाम 5:30 बजे एक फोन कॉल
NIA की जांच में एक और अहम खुलासा हुआ है. ऑपरेटर ने हमले के बाद शाम 5:30 बजे एक फोन कॉल किया था, जिसकी डिटेल्स अब जांच एजेंसी खंगाल रही है. इस कॉल की टाइमिंग और क‍िसे फोन क‍िया गया, इसकी पहचान को लेकर NIA जांच कर रही है, क्योंकि यह आतंकी नेटवर्क से संभावित संबंधों की ओर इशारा कर सकता है. NIA की टीमें घटनास्थल, बैसरन घाटी के 5 किलोमीटर के दायरे में मौजूद लोगों की लिस्ट तैयार कर रही हैं और चश्मदीदों के बयान दर्ज कर रही हैं. फोरेंसिक सैंपल भी लैब भेजे गए हैं, ताकि हमले के पीछे की साजिश का खुलासा हो सके.

खंगाली जा रही कुंडली
NIA अब ज‍िपलाइन ऑपरेटर की पूरी कुंडली खंगाल रही है. उससे जुड़े लोगों और हमले के वक्‍त वह क‍िसके संपर्क में था, उसका इरादा क्‍या था, इसकी एक-एक डिटेल खंगाल रही है. सूत्रों के मुताबिक, यह पता लगाया जा रहा है कि क्या ऑपरेटर का कोई आतंकी संगठन या पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से संबंध था, या उसका व्यवहार केवल लापरवाही का नतीजा था. यह भी देखा जा रहा है क‍ि कहीं डर की वजह से तो उसने धार्मिक नारेबाजी तो नहीं की. हमले के बाद ऑपरेटर को 23 अप्रैल को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन तब उसे छोड़ दिया गया. वायरल वीडियो सामने आने के बाद उसे दोबारा हिरासत में लिया गया है.

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