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रोजाना ब्रेड खाना बना सकता है इस दिमागी बीमारी का शिकार, रिसर्च में दावा…

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आजकल की व्यस्त जिंदगी में ब्रेड सबसे आसान नाश्ता है. जल्दी तैयार हो जाने और कई फ्लेवर में आने ये ब्रेड बच्चों से लेकर बड़ों तक की पसंद बन चुकी है. आज ज्यादातर लोग सुबह की शुरुआत ब्रेड जैम या ब्रेड-मक्खन जैसे नाश्ते के साथ करते हैं. लेकिन आसानी से मिलने वाली और तैयार हो जाने वाली ये ब्रेड कई परेशानियों की वजह भी बनती जा रही है. एक्सपर्ट का मानना है कि रोजाना ब्रेड खाने वाले लोगों को न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक बीमारियां भी शिकार बना सकती हैं.

ब्रेड में मौजूद हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स की वजह से ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ सकता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.ब्रेड में फाइबर और विटामिन ई की कमी होती है, जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और दिल की बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है. ब्रेड में मौजूद ग्लूटेन और रिफाइंड कार्ब्स कब्ज, पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होने की वजह से बहुत ज्यादा ब्रेड के कारण तेजी से वजन बढ़ सकता है. इसके अलावा रोजाना ब्रेड खाने से लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ने की आशंका रहती है. ब्रेड में कई तरह के प्रिजर्वेटिव्स और केमिकल्स मिलाए जाते हैं, जिससे शरीर का पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है.
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव:- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च बताती है कि रोजाना ब्रेड खाने से केवल शारीरिक ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक ब्रेड में मौजूद रिफाइंड कार्ब्स और ग्लूटेन डिप्रेशन, तनाव और एकाग्रता में कमी जैसी मानसिक समस्याओं का कारण बन सकते हैं. लगातार ब्रेड खाने से शरीर में सूजन भी आ सकती है, जिससे दिमाग के काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है.

रोजाना ब्रेड खाने से ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम की आशंका रहती है. दरअसल ब्रेड बनाने के लिए खमीर का इस्तेमाल होता है. रोजाना ब्रेड खाने से पेट में खमीर की मात्रा बढ़ सकती है. ऐसे में जब पेट में मौजूद बैक्टीरिया ब्रेड में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को पचाते है तो फर्मेंटेशन होता है, जिसकी वजह से पेट में शराब यानी इथेनॉल बनती है. जिसकी वजह से मरीज बिना शराब पिए ही नशे जैसे लक्षण महसूस करता है. ये एक तरीके की दिमागी बीमारी है, जो ज्यादा ब्रेड खाने वालों को हो सकती है.

कैसे करें बचाव?

1. ब्रेड को अपनी रोजाना की डाइट का हिस्सा ना बनाएं. इसकी जगह आटे की रोटी, दलिया, उपमा, पोहा जैसी चीजों को नाश्ते में शामिल करें.

2. खाने में ताजे फल, अंकुरित अनाज दालें लेना ज्यादा फायदेमंद रहता है क्योंकि इनमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर और पोषक तत्व होते हैं.

3. बाजार से ब्रेड खरीदते समय उसमें मौजूद तत्वों पर नजर डालें, हो सके तो होल व्हीट, मल्टी ग्रेन या बिना प्रिजर्वेटिव्स वाली ब्रेड चुने.

4. पेट और दिमाग से संबंधित कोई भी समस्या होने पर फौरन डॉक्टर से सलाह लें.

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