
18 जून 2025:- कहते हैं, घर में मांगलिक कार्य शुभ तिथि में ही करने चाहिए. इससे मांगलिक कार्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. फिर चाहे वह शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ हो या फिर गृह प्रवेश. वहीं कुछ तिथि ऐसी भी होती हैं, जिनमें मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है, जो चातुर्मास के दौरान आती हैं. आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है.इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा की जाती है और इसी दिन से चातुर्मास की भी शुरुआत हो जाती है. चातुर्मास के दौरान भूलकर भी मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. कब से चातुर्मास शुरू हो रहा है और कब समाप्त होगा? इस साल 2025 में देवशयनी या हरिशयन एकादशी 06 जुलाई को पड़ रही है और पारण 07 जुलाई को है. इस एकादशी के दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए नींद की मुद्रा में चले जाते हैं.इसके बाद से चातुर्मास आरंभ हो जाता है. जब भगवान विष्णु नींद की मुद्रा में होते हैं, तब किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य करना मना होता है. हालांकि, चातुर्मास में पूजा-पाठ की कोई मनाही नहीं होती है. वहीं साल 2025 में 01 नवंबर को देवउठान एकादशी का व्रत रखा जाएगा और इसी दिन चातुर्मास का समापन भी हो जाएगा.
चातुर्मास में भूलकर भी न करें ये कार्य
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि चातुर्मास के दौरान कुछ ऐसे कार्य हैं, जो बिल्कुल मना किए गए हैं, जैसे कि किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य, जैसे शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, जनेऊ वगैरह. इसके अलावा साग का सेवन करना भी चातुर्मास में मना होता है. इस दौरान मांगलिक कार्यक्रम करने से अशुभ फल मिल सकता है ऐसी मान्यता है. इसी वजह से इस दौरान कोई भी अच्छा काम, नयी खरीदारी नहीं की जाती.



