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डॉक्टरों को बड़ी राहत: एमबीबीएस की बांड सेवा एक साल, ईडब्लूएस की खाली सीटें सामान्य वर्ग

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रायपुर :  एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद दो साल की अनुबंध सेवा को घटाकर अब एक साल कर दिया गया है। इसके अलावा ईडब्लूएस कोटे की रिक्त सीटों का आवंटन सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा स्नातक प्रवेश नियम में संशोधन किया गया है।

चिकित्सा छात्रों द्वारा अन्य राज्यों का हवाला देकर अनुबंध सेवा अवधि को कम करने की मांग काफी समय से की जाती रही है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा नियम में संशोधन करते हुए इसे दो साल से घटाकर एक साल कर दिया गया है। इसके साथ इस माह के अंत से शुरू होने वाले यूजी पाठ्यक्रम 2025-माह के अंत से शुरू होने वाले यूजी पाठ्यक्रम 2025-26 के प्रवेश नियमों में संशोधन किया है। एमबीबीएस, बीडीएस एवं बीपीटी के पाठ्यक्रमों में किए गए बदलाव को विद्यार्थी हित में अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बताया गया है। बांड अवधि को आधा करने और ईडब्लूएस की रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए अनारक्षित वर्ग के अभ्यार्थियों को प्राथमिकता देने के अलावा नियमों में कुछ और संशोधन किये गये हैं।

मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे में मूल निवासी को प्राथमिकता
काउंसिलिंग के दौरान निजी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रबंधन और एनआरआई कोटे में आरक्षित वर्ग की रिक्त सीटों के आवंटन के लिए छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को प्राथमिकता देने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा ओबीसी वर्ग के लिए आय प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की कठिनाईयों को दूर करने संबंधित मापदंडों को सरल किया गया है।

प्रत्येक चरण में पंजीयन
काउंसलिंग के प्रत्येक राउंड में पंजीयन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन नए नियमों के अनुसार काउंसलिंग की प्रक्रिया दिनांक 30 जुलाई से प्रारंभहोगी। यह निर्णय राज्य के चिकित्सा विद्यार्थियों को अधिक अवसर प्रदान करने तथा प्रकिया को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समस्त काउंसलिंग प्रक्रिया अब पूर्ण रूप से ऑनलाइन होगी। सीट आवंटन एवं प्रवेश की सम्पूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएगी।

मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे में मूल निवासी को प्राथमिकता
काउंसिलिंग के दौरान निजी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रबंधन और एनआरआई कोटे में आरक्षित वर्ग की रिक्त सीटों के आवंटन के लिए छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को प्राथमिकता देने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा ओबीसी वर्ग के लिए आय प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की कठिनाईयों को दूर करने संबंधित मापदंडों को सरल किया गया है।

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