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बिजली से करंट लगने के बाद क्या करें? जानिए फर्स्ट एड क्यों है ये ज़रूरी…

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अगर किसी को अचानक बिजली का झटका लग जाए, तो घबराने की बजाय तुरंत सही कदम उठाना ज़रूरी होता है, क्योंकि बिजली का करंट शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है, और कई बार जान का खतरा भी हो सकता है. हाई वोल्टेज या लंबे समय तक करंट में फंसे रहना दिल की धड़कन, सांस रुकने या जलने जैसी स्थितियां पैदा कर सकता है. इसलिए सही समय पर दी गई फर्स्ट एड ज़िंदगी बचा सकती है.अगर कोई व्यक्ति करंट की चपेट में है, तो उसे सीधे हाथ लगाना खतरनाक हो सकता है. सबसे पहले बिजली का मुख्य स्विच बंद करें या लकड़ी की छड़ी या प्लास्टिक की चीज़ से उसे बिजली स्रोत से दूर करें. ध्यान रहे कि आप खुद गीले न हों और न ही कोई मेटल या गीली चीज़ को छू रहे हों. एक बार व्यक्ति करंट से अलग हो जाए, तो उसकी हालत देखें वो होश में है या नहीं, सांस ले रहा है या नहीं.

होश नहीं है तो क्या करें:- अगर व्यक्ति बेहोश है और सांस नहीं ले रहा, तो तुरंत सीपीआर (CPR) देना शुरू करें. अगर आप सीपीआर नहीं जानते हैं, तो आसपास किसी को मदद के लिए बुलाएं और एम्बुलेंस कॉल करें. दिल और सांस की क्रिया को चालू रखना बेहद ज़रूरी होता है. जब तक मेडिकल टीम न पहुंचे, तब तक बेसिक फर्स्ट एड देते रहें.

बिजली लगने पर फर्स्ट एड किट में क्या-क्या होना चाहिए

1. इंसुलेटेड दस्ताने (Rubber gloves)

2. CPR फेस शील्ड या मास्क

3. गौज पैड और स्टरलाइज्ड पट्टियां- घाव ढकने के लिए

4. एंटीसेप्टिक सॉल्यूशन या वाइप्स

5. बर्न क्रीम या जेल- जलन कम करने के लिए

6. डिजिटल थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर मॉनिटर (यदि संभव हो)

7. इमरजेंसी कॉन्टैक्ट लिस्ट और फर्स्ट एड मैन्युअल

बिजली लगने के बाद डॉक्टर को दिखाना क्यों जरूरी है:- बिजली का झटका सिर्फ ऊपर से नहीं, अंदरूनी अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है. दिल की धड़कन गड़बड़ होना, मांसपेशियों में जलन, या नर्वस सिस्टम पर असर होना संभव है. कई बार शुरुआती लक्षण हल्के लग सकते हैं लेकिन कुछ घंटों बाद स्थिति बिगड़ सकती है. इसलिए बिजली लगने के बाद चाहे व्यक्ति ठीक दिखे, फिर भी एक बार मेडिकल चेकअप कराना ज़रूरी होता है.

 

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